दैनिक जीवन में हमें भी कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन हमें कभी भी रुकना नहीं चाहिए। लगातार आगे बढ़ते रहने से ही हम कामयाब हो सकते हैं। कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनका समाधान ताकत और जोश से नहीं, बल्कि बुद्धिमानी से निकल सकता है। इस संबंध में श्रीरामचरित मानस का एक प्रसंग प्रचलित है। ये प्रसंग सुंदरकांड का है।
श्रीरामचरित मानस के सुंदरकांड में हनुमानजी जब सीता की खोज में समुद्र पार कर रहे थे, तब उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था। सुरसा और सिंहिका नाम की राक्षसियों ने हनुमानजी को समुद्र पार करने से रोकना चाहा था, लेकिन बजरंग बली नहीं रुके और लंका तक पहुंच गए।
जब सुरसा ने हनुमानजी का रास्ता रोका तो उन्होंने उससे लड़ने में समय नहीं गंवाया। सुरसा हनुमानजी को खाना चाहती थी। उस समय हनुमानजी ने जोश से नहीं, बुद्धि का उपयोग किया। हनुमानजी सुरसा से युद्ध भी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने अपने शरीर का आकार बढ़ा लिया।
हनुमानजी का आकार देखकर सुरसा ने भी अपना मुंह हनुमानजी के आकार से भी ज्यादा बढ़ा कर लिया। तब हनुमानजी ने अचानक अपना रूप छोटा कर लिया। छोटा रूप करने के बाद हनुमानजी सुरसा के मुंह में प्रवेश करके वापस बाहर आ गए। हनुमानजी की इस बुद्धिमानी से सुरसा प्रसन्न हो गई और रास्ता छोड़ दिया। हमें भी व्यर्थ समय बर्बाद नहीं करना चाहिए, बुद्धि का उपयोग करके ऐसी बाधाओं से बच सकते हैं।
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