कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लोग रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी पॉवर) बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। इसके लिए आयुर्वेदिक दवाइयां और मल्टीविटामिन टैबलेट्स ले रहे हैं। इसके अलावा च्यवनप्राश की मांग भी बढ़ गई है। च्यवनप्राश की मांग सर्दी के मौसम में अधिक हाेती है और गर्मी के मौसम में इसकी मांग काफी कम हो जाती थी लेकिन इस बार इम्युनिटी बढ़ाने के लिए लोग गर्मी में भी च्यवनप्राश का सेवन कर रहे हैं। यही कारण है कि इस बार सर्दी के मौसम की तुलना में भरी गर्मी में डेढ़ गुना ज्यादा च्यवनप्राश बिक गया है। सर्दी में शहर में करीब 10 लाख रुपए का च्यवनप्राश लोग खा लेते हैं। इस बार गर्मी के मौसम में 15 लाख रुपए का च्यवनप्राश बिक गया है।
शहर सहित पूरे जिले में कोरोना संक्रमण के केस बढ़ गए हैं। जिले में अभी 53 मरीज मिल चुके हैं। इनमें 39 एक्टिव केस हैं। ऐसे में मार्च तक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवाओं की अधिक डिमांड नहींं थी लेकिन मरीजों के बढ़ने के साथ ही अब ऐसी दवाओं की डिमांड बढ़ गई है। आयुर्वेद में इम्यून प्लस, गिलोय काढ़ा व अन्य तरह के सिरप खूब बिक रहे हैं, जिनकी पहले कभी अधिक डिमांड नहींं रही। अब इन आयुर्वेदिक दवाओं की डिमांड हर महीने करीब 5-6 लाख रुपए की आ रही है जो पहले सिर्फ 50 हजार से 1 लाख रुपए तक थी। इसके साथ ही मल्टीविटामिन कैप्सूल और विटामिन सी टैबलेट की डिमांड भी बढ़ गई है। विटामिन सी टैबलेट कोरोना के फैलने के पहले इतनी नहींं बिक रही थी। इसकी डिमांड थोक व्यापारी के अनुसार पहले 1 लाख से लेकर 1.5 लाख रुपए तक की थी, लेकिन अब 4-5 लाख रुपए की उक्त दवा हर महीने बिक रही है।
विटामिन सी की टैबलेट ठीक लेकिन हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन खतरनाक
जिला अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. जेएन सक्सेना ने बताया कि विटामिन सी की टैबलेट हम भी लोगों को रिकमंड कर रहे हैं। इससे कोई नुकसान नहींं है। मल्टीविटामिन टैबलेट व कैप्सूल भी लोग ले रहे हैं तो इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और पेट ठीक से साफ होगा। च्यवनप्राश में प्रोटीन के साथ कई विटामिन तत्व होते हैं। हां बिना डॉक्टरी सलाह के हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन दवा नहींं लेना है, इससे उन्हें नुकसान होगा।
डॉक्टर बोले- आयुर्वेदिक दवाएं भी बिना चेकअप के न लें
जिला आयुष अधिकारी डॉ. जीपी वर्मा का कहना है कि आयुर्वेद की कोई भी दवा बिना चेकअप के ठीक नहींं है। आयुर्वेदिक दवा लेने का भी एक तरीका होता है। मरीज और सामान्य व्यक्ति को उनकी स्थिति के अनुसार सीमित मात्रा में ही दवाई दी जाती है। अगर बाजार में लोग इसे खरीदकर खुद ही ले रहे हैं तो यह ठीक नहींं है क्योंकि लोगों को मालूम नहीं है कि आयुर्वेदिक दवा कितनी मात्रा में किसे लेनी है और कैसे लेनी है। हालांकि इसके साइड इफेक्ट कम होते हैं, फिर भी रिस्क हो है ही। इससे आपकी पाचन क्रिया खराब हो सकती है और पेट से संबंधित बीमारी बढ़ सकती है।
हां बढ़ रही डिमांड... इनमें मल्टीविटामिन कैप्सूल और विटामिन टैबलेट के साथ च्यवनप्राश ज्यादा बिक रहा
च्यवनप्राश और मल्टीविटामिन से कोई नुकसान नहींं
हो सकता है कि मार्केट में शारीरिक क्षमता बढ़ने के लिए दवाओं की डिमांड बढ़ गई हो। अगर इनमें च्यवनप्राश व मल्टीविटामिन की दवाएं है तो इससे कोई नुकसान नहींं है।
डॉ. आरबी गोयल, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल श्योपुर
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