रामायण के प्रसंगों में दुखों को दूर करने के कई सूत्र बताए गए हैं। जानिए ऐसा ही एक प्रसंग, जिसमें बताया गया है कि किसी समस्या का समाधान कैसे खोजना चाहिए। श्रीरामचरित मानस के अनुसार जब रावण सीता का हरण करके लंका ले गया तो श्रीराम वानर सेना की मदद से सीता की खोज कर रहे थे।
हनुमानजी सीता की खोज करते हुए लंका की अशोक वाटिका में पहुंच गए। वे सीता के सामने जाते उससे पहले वहां रावण आ गया तो हनुमान अशोक वृक्ष के ऊपर छिपकर बैठ गए। इसी वृक्ष के नीचे माता सीता बैठीं हुई थीं। रावण ने सीता को तरह-तरह के प्रलोभन दिए, अपनी शक्ति का भय दिखाया, जिससे माता बहुत डर गई थीं। जब रावण सीता को डरा रहा था, उस समय हनुमानजी भी वहीं थे, लेकिन सीता उन्हें देख नहीं सकी थीं। रावण के जाने के बाद हनुमान ने सीता से भेंट की और उनके दुख को दूर किया था।
प्रसंग की सीख
इस प्रसंग की सीख यह है कि हमारे जीवन में जब भी कोई समस्या आए तो हमें शांति से काम लेना चाहिए। समस्या के आसपास ही समाधान को खोजना चाहिए। इस प्रसंग में रावण समस्या है और हनुमानजी समाधान है। सीता के सामने रावण था, जो उन्हें दुखी कर रह था और हनुमानजी यानी इन दुखों का समाधान भी वहीं था। रावण के जाने के बाद हनुमानजी सीता के सामने आए और उनके दुखों को दूर किया।
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