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विधायक रामेश्वर शर्मा होंगे मप्र विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर | प्रोटेम स्पीकर क्या होता है जानने के लिए पढ़िए हमारी पूरी रिपोर्ट |


भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा के सामयिक अध्यक्ष (प्रोटेम स्पीकर) के तौर पर विधायक रामेश्वर शर्मा की नियुक्ति की गई है। राज्यपाल ने शर्मा को अध्यक्ष का निर्वाचन होने तक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है। इससे पहले प्रोटेम स्पीकर के तौर पर जगदीश देवड़ा कार्यरत थे। लेकिन उन्होंने दो जुलाई को त्यागपत्र दे दिया था। मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। 

जगदीश देवड़ा शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं। इसके अलावा उपाध्यक्ष पद भी रिक्त है। इसलिए प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति की गई है। शर्मा भोपाल जिले की हुजूर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक हैं। 

मंत्रिमंडल विस्तार में शर्मा को मंत्री पद नहीं मिल पाने की वजह से वह थोड़े नाराज भी चल रहे थे, ऐसे में पार्टी ने उन्हें प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करके साधने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि शर्मा को पार्टी ने उनके जन्मदिन के ठीक एक दिन पहले प्रोटेम स्पीकर बनाया है।

क्या होता है प्रोटेम स्पीकर
आमतौर पर प्रोटेम स्पीकर का काम नए सदस्यो को शपथ दिलाना और स्पीकर (विधानसभा अध्यक्ष ) का चुनाव कराना होता हैं. लेकिन जब प्रोटेम स्पीकर के जरिए फ्लोर टेस्ट कराने की बात कही गई है तो उसका रोल काफी महत्वपूर्ण हो जाता हैं. आमतौर पर सबसे सीनियर मोस्ट विधायक यानि जो सबसे ज्यादा बार चुनाव जीतकर आया हो , उसे प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है लेकिन राज्यपाल इसे माने ये जरूरी नहीं है | विधानसभा सचिवालय की तरफ से राज्यपाल को सीनियर मोस्ट विधायकों के नाम भेजे जाते है और राज्यपाल उनसे से एक सीनियर मोस्ट विधायक को चुनता है, ये राज्यपाल के विशेषाधिकार है कि वो किसे चुने. जैसा कि साल 2018  में कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई ने बीजेपी नेता के.जी. बोपाया को प्रोटेम स्पीकर बनाया कांग्रेस पार्टी की आर. वी देशपांड़े की जगह. 

प्रोटेम स्पीकर का कर्तव्य
प्रोटेम (Pro-tem) लैटिन शब्‍द प्रो टैम्‍पोर(Pro Tempore) का संक्षिप्‍त रूप है. इसका शाब्दिक आशय होता है-'कुछ समय के लिए.' प्रोटेम स्‍पीकर की नियुक्ति गवर्नर करता है और इसकी नियुक्ति आमतौर पर तब तक के लिए होती है जब तक विधानसभा अपना स्‍थायी विधानभा अध्‍यक्ष नहीं चुन लेती. यह नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ-ग्रहण कराता है और यह पूरा कार्यक्रम इसी की देखरेख में होता है. सदन में जब तक विधायक शपथ नहीं लेते, तब तक उनको सदन का हिस्‍सा नहीं माना जाता.

प्रोटेम स्पीकर की शक्ति
प्रोटेम स्पीकर की सबसे बड़ी ताकत होती है कि वो वोट को क्लालिफाई या डिसक्वालिफाई घोषित कर सकता है. इसके साथ ही वोट की गिनती समान होने और टाई की स्थिति आने पर उसके पास निर्णायक वोट करने का अधिकार होता है.

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