Type Here to Get Search Results !

Random Posts

4/footer/random

विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत परामर्श सत्र आयोजित

विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत परामर्श सत्र आयोजित



जिला चिकित्सालय के ट्रामा सेंटर में गुरूवार को विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत स्तनपान परामर्श सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार धाकड़ द्वारा गर्भवती माताओं एवं स्तनपान करने वाली माताओं को मां के दूध के महत्व पर विशेष समझाईश दी गई। डॉ. धाकड़ द्वारा आईएमएस एक्ट (इन्फेन्ट मिल्क सब्सिटीट्यूट) (स्तनपान संरक्षण अधिनियम 2003)के बारे में जानकारी देते हुये बताया गया कि इस अधिनियम का उल्लंघन करने वालों को तीन वर्ष का कारावास एवं 5000 रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। अधिनियम के तहत् शिशु दूध, पूरक शिशु आहार एवं दूध की बोतले बनाने वाले जो दो वर्ष तक की आयु वाले बच्चों के लिये किसी भी नाम से आहार के प्रयोग को बढ़ावा देते हैं तथा 6 माह की आयु से पहले शिशु आहार के प्रयोग को बढ़ावा देते हैं उनके विरूद्ध कार्यवाही का प्रावधान है। गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को पौष्टिक आहार के सेवन के लिये प्रेरित किया गया।
सिविल सर्जन डॉ. अशोक बारंगा ने बताया कि मां के दूध में सभी तरह के कार्बोहाइट्रेड एवं विटामिनों का समावेश होता है एवं इसके पिलाने से बच्चे को किसी प्रकार के संक्रमण का भय नहीं होता। इसके सेवन से बच्चे बीमारियों से बचे रहते हैं।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अरविन्द कुमार भट्ट ने बताया कि कोरोना काल में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। कोविड संक्रमित मॉ के द्वारा भी समय-समय पर 20 सेकेण्ड तक हाथों की सफाई एवं मास्क का उपयोग कर शिशु को स्तनपान कराया जा सकता है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रेणुका गोहिया ने स्तनपान के महत्व पर विस्तार पूर्वक विस्तृत जानकारी दी। जन्म के तुरंन्त बाद 1 घन्टे के भीतर मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (जिसे कोल्स्ट्रम कहते हैं) के पिलाने से शिशु को होने वाले लाभ, शिशु का शारीरिक मानसिक विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता का बढऩा, शिशु की पाचन शक्ति को बढ़ाना, स्तनपान से माता को होने वाले लाभ जैसे स्तन केैंसर, अंडाशय के कैंसर से बचाव की जानकारी दी। स्तनपान से मां के स्तनों में होने वाली तकलीफ एवं बीमारियों से भी संरक्षण होता है। लगातार 6 माह तक केवल स्तनपान करवायें तथा किसी प्रकार की घुट्टी, शहद गुड़ का पानी, शक्कर का पानी, ऊपरी दूध आदि शिशु को नहीं दिया जाना चाहिये तथा स्तनपान से सम्बधित भ्रांतियों का निवारण किया गया। छ: माह के पश्चात् शिशु को स्तनपान के साथ ठोस एवं नरम उपरी आहार जैसे- दूध, दलिया, खिचड़ी, सत्तु एवं उबले एवं मसले फल, सब्जियां इत्यादि नरम पोषण आहारों का सेवन कराना अति आवश्यक होता है जिससे शिशु का शरीरिक एवं मानसिक विकास भलीभांति होता है।
जिला मीडिया अधिकारी श्रीमती श्रुति गौर तोमर द्वारा बताया गया कि वर्ष 2020 की थीम सपोर्ट ब्रेस्ट फीडिंग फॉर अ हेल्दियर प्लेेनेट अर्थात स्तनपान दिवस ध्येेय वाक्य एक स्वस्थ ग्रह के लिये स्तनपान का समर्थन है। स्तनपान शिशु, माता, परिवार एवं समुदाय के लिये किस प्रकार लाभकारी है तथा शिशु की जीवन क्षमता को किस प्रकार बढ़ाता है, के संबंध में जानकारी दी।
उप जिला विस्तार एवं माध्यम श्रीमती अभिलाषा खर्डेकर द्वारा स्तनपान दिवस पर शिशु को स्तनपान करवाने का सही तरीका, जन्म के तुरन्त बाद 1 घन्टे के भीतर स्तनपान करवाने का महत्व तथा 6 माह तक स्तनपान करवाने से मां एवं शिशु को जीवन संजीवनी लाभ के बारे में जानकारी दी गई।
उक्त परामर्श सत्र में महिलाओं की जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का समाधान भी किया गया। सत्र में डी.पी.एम. डॉ. विनोद शाक्य एवं उप मीडिया अधिकारी श्री महेशराम गुबरेले, गर्भवती माताएं, स्तनपान कराने वाली माताएं तथा उनके परिजन उपस्थित रहे।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad