बैतूल। बीते लगभग दो महीनों में corona का कहर झेल रहे भारत में लाखो लोगों को सरकार की अपूरणीय तैयारियों के कारण जान से हाथ धोना पड़ा। सरकारी आंकड़े केवल वहीं संख्या है जो अस्पतालो भर्ती होकर मर गए, परंतु जिन्होंने सड़को पर और घरों में बिना चिकित्सीय सहायता मिले दम तोड़ा है, वह संख्या केवल उनके परिजनों को ही पता है। Corona से जो मर गए है, वोह पारिवारिक क्षति है, जो कभी पूर्ति नहीं की जा सकती है, ऐसे परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति और संवेदना प्रगट करता हूं। लेकिन जो लोग इलाज पा गए और बच गए है, वोह परिवार भी लाखो के कर्ज में डूब गए है। सब ने कुछ ना कुछ खो दिया। जनता की शिकायतों को बड़ी चालाकी से दबा दिया गया है। जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई।प्रशासन केवल सरकार के लिए काम करता दिख रहा था। परंतु आने वाली तीसरी लहर का भी फरमान सरकार और दूसरी एजेंसी द्वारा किया जा रहा है। जिसकी सुकबुगाहट उत्रराखंड से शुरू हो चुकी है। वहा बच्चे संक्रमित पाए जा रहे है। ऐसे में पिछली गलतियों से क्या सबक लेकर तैयारियां की जाएंगी? बात अब शायद बच्चो पर आ रही है, तो मामला गंभीर होगा। समय रहते इसके लिए रणनीति पहले से बनाई जाए ताकि अफरातफरी का माहौल फिर ने बने तो बेहतर होगा। बहुत ही संवेदनशीलता के साथ मेरी बातो को लेना होगा। चाइल्ड स्पेशलिस्ट से मिलकर अभी से उनसे पूछना होगा कि किस तरह की मैनेजमेंट उन्हे लगेगा और कैसे परिवारजन और प्रशासन और जनता उन्हें मदद करेंगे। बच्चो की हिसाब से दवाओं का संग्रह और ऑक्सीजन की तैयारियों पर जोर देना होगा। ईश्वर से प्रार्थना है, की ऐसा कुछ ना हो, परंतु अगर हो तो बेहतर तरीके से हम बच्चो को संकर्मित होने से कैसे बचा सकते है, इसपर अभी से सोचना होगा। स्पेंसर लाल जी ने कहा, कि संक्रमण काल को पैसे कमाने का अवसर ना बनाकर बल्कि बीमारी से बचाने का अवसर ढूंढना पड़ेगा। इसका ये कोई मतलब ना निकले की सरकारी दावों के द्वारा केवल बच्चे ही तीसरी लहर का शिकार बनेंगे, बल्कि अभी भी जो लापरवाही बरतेंगे उन्हे दुबारा भी संक्रमण जो सकता है। ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण भी एक बचाव होगा। अस्पतालों में अभी से समुचित व्यवस्था बनानी होगी। परिजनों को विश्वास में कैसे लेकर इलाज किया जाएगा? इसपर भी सोचा जाएं। बेहतर तालमेल और कठोर अंकुश के द्वारा जिले की चिकित्सीय प्रणाली का सही सही और पूरा पूरा इस्तेमाल कैसे हो,सुनिश्चित किया जाएं। शायर धीरे दूसरी लहर अब समाप्ति की और है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। सोशल डिस्तांसिंग और मास्क,और भीड़ से बचना ही रोकथाम का बेहतर और सरल जरिया है। मरने के बाद मुव्वाजा देने से बेहतर है, की सरकार coronalogo के जीते जी ईलाज का पूरा खर्चा वहन करें। मध्य प्रदेश सरकार भी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए lockdown के कारण बंद पड़े व्यापार और धंधे की मार झेल रही जनता को तुरंत राहत देने का कार्य करते हुए, बिजली बिल और लोगो कि ईएमी को माफ करवा कर जनता पर उपकार करें और कुछ दिनों के लिए जो राज्य का टैक्स पेट्रोल, डीजल, और खाने के तेल से हटा कर मेंहगाई कम करने की दिशा में कार्य करें।
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