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खाटु बाबा के श्रंगार के लिए कलकत्ता से फूल, वृंदावन से चंदन, कन्नौज से इत्र और जयपुर से आता है बाघा। बाबा का श्रंगार देखने दूर दूर से आते है प्रेमी। देखें वीडियो

खाटु बाबा के श्रंगार के लिए कलकत्ता से फूल, वृंदावन से चंदन, कन्नौज से इत्र और जयपुर से आता है बाघा। बाबा का श्रंगार देखने दूर दूर से आते है प्रेमी


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मुलताई में खाटू वाले श्याम बाबा का श्रंगार देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।बाबा के श्रंगार के लिए श्रद्धालु भी कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ते हैं।बाबा को सजाने के लिए कोलकाता से प्लेन के माध्यम से फुल बुलाए जाते हैं,वही वृंदावन से चंदन आता है तो कन्नौज से इत्र और जयपुर से बाघा बुलाया जाता है।श्याम प्रेमी आपस में मिलकर इस श्रंगार की व्यवस्था करते हैं। वही उत्तर प्रदेश के पंडितों द्वारा 2 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद बाबा का भव्य श्रृंगार किया जाता है। खाटू वाले श्याम के ठाठ ऐसे निराले हैं कि उनकी दिन में 5 बार आरती होती है और दो बार भोग लगाया जाता है। मुलताई में बाबा श्याम के 2 मंदिर हैं।बाबा का मुख्य मंदिर राजस्थान के खाटू में है,लेकिन अब मुलताई में बाबा के हजारों भक्त हो चुके हैं।ऐसे में सुबह-शाम दर्शनों के लिए मंदिर में भक्तों की भीड़ लगती है मुलताई के मासोद रोड पर स्थित श्याम की हवेली मंदिर में तो सुबह 5:00 बजे होने वाली आरती में भी सैकड़ों भक्त रहते हैं।

---हारे का सहारा कहलाते है बाबा श्याम---
 श्रद्धालुओं ने बताया कि बाबा श्याम हारे का सहारा है और  उनके दरबार में हर मुराद पूरी होती है। बाबा के मंदिर में एक नारियल बांधने से और इत्र चढ़ाने से बाबा खुश हो जाते हैं और भक्तों की हर बिगड़ी बनाते हैं।

---दूर-दूर से आते है श्रद्धालु---
बाबा श्याम के दर्शन के लिए मुलताई में नागपुर, इटारसी, भोपाल, वरुड, बेतूल,सावनेर,छिंदवाड़ा सहित दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि जिस तरह त्रेतायुग में भगवान राम, द्वापरयुग में भगवान कृष्ण लोगों की सहायता करते थे, उसी तरह कलयुग में बाबा श्याम लोगों का उद्धार करने के लिए बैठे हैं और सबकी बिगड़ी बनाते हैं।

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