इन दिनों उमस भरी गर्मी से लोग बेचैन है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि शरीर को ठंडक देने वाले जूस व आइसक्रीम जैसे खाद्य पदार्थों से लोग दूर है।
यही कारण है कि इस साल इनकी बिक्री में 60 से 70 फीसदी गिरावट आ गई। दूसरी ओर लोग आयुर्वेद दवाओं का जम कर सेवन कर रहे है। ताकि शरीर की इम्युनिटी पावर ठीक रहे। कोरोना नुकसान नहीं पहुंचा सके। यही कारण है कि इम्युनिटी बढ़ाने वाले आयुर्वेदिक प्रोडक्ट की डिमांड सौ फीसदी से अधिक बढ़ गई।
कोरोना के कहर से बचने के लिए विज्ञान भले की अब तक कोई वैक्सीन या दवा न खोज पाया हो, लेकिन विभिन्न शोध में यह तय हो गया कि अगर शरीर का इम्युनिटी पावर अच्छा है तो कोरोना वायरस कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाता। यही कारण है कि लोग कोरोना का कहर शुरू होते ही इम्युनिटी पावर बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन नियमित रूप से कर रहे है। आयुर्वेदिक दवा के विक्रेता अनिल नगरिया बताते है कि कोरोना काल में गिलोय रस. गिलोय घनवटी, अश्वगंधा, च्यवनप्राश जैसे प्रोडक्ट की मांग बहुत बढ़ गई। लोग आंवला के प्रोडेक्ट, जूस व कैंडी की भी मांग कर रहे है। कोरोना से पहले और वर्तमान की तुलना करें दो से ढाई गुना तक इन प्रोडक्ट की मांग निकल रही है। मांग लगातार बढ़ रही है।
जूस सहित ठंडे पेय पदार्थों से लाेगों ने बनाई दूरी
गर्मी के सीजन में कई कंपनियां आम सहित विभिन्न फलों के जूस बाजार में उतारती है। गर्मी में लोग काफी चाव के साथ इनका सेवन भी करते थे। लेकिन इस गर्मी के सीजन में लोगों ने इनसे दूरी बना ली। कारण ठंडे पेय पदार्थों के सेवन लोगों को खांसी, जुकाम की संभावनाएं भी अधिक रहती है। कोरोना में यह प्रमुख लक्षण है। ऐसे में लोग खांसी, जुकाम का शिकार न हो जाए, लोग उन्हें संदेह की निगाह से न देखे। इसलिए लोग ठंडे पेय पदार्थों से दूरी बना रहे है। कनफेक्शनरी विक्रेता लकी गुप्ता कहते है कि आईसक्रीम सहित जूस की बिक्री 60 से 70 फीसदी तक गिर गई है। थोक विक्रेता अनिल नगरिया इसका समर्थन करते है। श्री नगरिया के अनुसार पौष्टिक मानी जाने वाली ठंडाई से भी लोग दूरी बना रहे है।
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