भोपाल. कोरोना रोगी को सड़क पर छोड़कर जाने और उसके बाद उसकी मौत के मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने दिए हैं। जांच अपर जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) सतीश कुमार द्वारा की जाएगी। मजिस्ट्रियल जांच में देखा जाएगा कि रोगी 23 जून, 2020 से पीपुल्स जनरल हॉस्पिटल, मालवीय नगर, भोपाल में भर्ती था, तो ऐसी कौन-सी परिस्थिति उत्पन्न हुई कि उसे अन्य अस्पताल में रैफर करने का निर्णय लिया गया। दूसरे अस्पताल में रेफर करने से पहले कोरोना रोगी के परिवार को मौजूदा स्थिति के बारे में पूरी जानकारी दी गई थी। इसके साथ ही मरीज की शिफ्टिंग के लिए सहमति हासिल की गई थी।
जांच में ये भी देखा जाएगा कि कोरोना मरीज को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करते समय ऐसे रेफर एवं ट्रांसफर करने के लिए समय-समय पर जारी नियमों एवं प्रोटोकॉल का पालन किया गया था। किन कारणों से मरीज को एंबुलेंस से वापस लाने की स्थिति निर्मित हुई थी। किन परिस्थितियों में रोगी की मृत्यु हुई। क्या इसके लिए कोई जिम्मेदार है। इसके अतिरिक्त जांच के दौरान अन्य बिन्दु जो दृष्टिगत होंगे, उनको भी जांच में लिया जाएगा।
एंबुलेंस चालक मरीज को रोड पर छोड़कर भागा
दो अस्पतालों के बीच उलझकर सोमवार को एक कोरोना पेशेंट की जान चली गई थी। बिजली कंपनी के लाइन इंस्पेक्टर 59 साल के वाजिद अली पीपुल्स हाईटेक हॉस्पिटल मालवीय नगर में 13 दिन पहले किडनी के इलाज के लिए भर्ती हुए थे। सोमवार सुबह उनकी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो शाम को उन्हें लेने चिरायु अस्पताल से एंबुलेंस आई थी।
तबीयत बिगड़ती लगी तो ड्राइवर उन्हें रास्ते से वापस ले आया, लेकिन पीपुल्स हॉस्पिटल ने दोबारा भर्ती करने से मना कर दिया। स्ट्रेचर भी नहीं दिया। इस पर ड्राइवर पेशेंट को पार्किंग एरिया में उन्हें जमीन पर ही पटककर चला गया। बाद में पीपुल्स हॉस्पिटल के पीपीई किट में दो कर्मचारी ऑक्सीजन लेकर आए, उन्हें स्ट्रेचर पर लेटाया। सीपीआर देने की कोशिश की, लेकिन तब तक उनकी सांसें टूट चुकी थीं। सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी ने कमेटी गठित कर मामले की जांच कराने का कहा है।

