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दुनिया में जो Corona Vaccine बन रही हैं उनमें सबसे असरदार कौन सी है?

दुनिया में जो कोरोना वैक्सीन बन रही हैं उनमें सबसे असरदार कौन सी है?

हमदर्द न्यूज : 6 लाख से ज्यादा लोगों की जान लील चुके कोरोना वायरस का कहर बढ़ता ही जा रहा है. करीब डेढ़ करोड़ लोग अब तक इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं. अब तक इस वायरस की कोई काट नहीं मिल पाई है. दुनिया के अलग-अलग देशों में इसकी वैक्सीन पर काम चल रहा है. भारत में भी दो वैक्सीनों का इंसानों पर परीक्षण चल रहा है.

डब्लूएचओ के मुताबिक दुनिया भर में करीब 120 टीमें वैक्सीन बनाने की कोशिशों में जुटी हुई हैं. अब सवाल ये है कि इन वैक्सीनों में से कौन सी ज्यादा सफल होगी. मतलब ये कि अब तक की रेस में किस देश की वैक्सीन सबसे आगे चल रही है? जवाब अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन की बात ही अलग है.



ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वैक्सीन
कई वैक्सीनों का इंसानों पर ट्रायल किया जा रहा है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन का भी पहला ट्रायल पूरा हो चुका है. इस ट्रायल से साफ हो गया कि ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन बाकियों से आगे निकल चुकी है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यह वैक्सीन कोरोना वायरस से डबल सुरक्षा देती है. मतलब ये कि इससे कोरोना तो खत्म होगा ही, साथ ही वो सालों तक शरीर में वापस आने की हिम्मत नहीं करेगा.

इसे आसान भाषा में समझ लेते हैं. आमतौर पर जब भी किसी बीमारी की वैक्सीन बनाई जाती है तो ये देखा जाता है कि शरीर में उस बीमारी से लड़ने की क्षमता विकसित हो पा रही है या नहीं. मतलब ये कि वैक्सीन लगाने के बाद शरीर में बीमारी से लड़ने के लिए सैनिकों की फौज खड़ी हो रही है तो समझ जाइए वैक्सीन ने अपना काम कर दिया. इन सैनिकों को मेडिकल की भाषा में एंटीबॉडी कहते हैं.

वैक्सीन की खासियत
अब मान लीजिए कि वैक्सीन लगाने के बाद शरीर में किसी बीमारी से लड़ने के लिए सैनिक आ गए. सैनिकों ने बीमारी को हरा भी दिया. कुछ वक्त के बाद ये सैनिक ड्यूटी करते-करते थकने और बूढ़े होने लगते हैं. यूं समझ लें कि इनकी ताकत कम होने लगती है. ऐसा होने पर बीमारी के दोबारा शरीर में आने के चांस बढ़ जाते हैं. फिर हमें जरूरत पड़ती है ऐसे सैनिकों की जो सालों तक लड़ाई लड़ सकें. 

शरीर में लंबी लड़ाई लड़ने वाले सैनिकों को व्हाइट ब्लड सेल्स (White Blood Cells) कहते हैं. इनकी खासियत है कि ये सालों तक बिना थके और बिना रुके हमारे शरीर की पहरेदारी करते हैं. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वैक्सीन ने भी यही कमाल किया है. यही बात इसे बाकी वैक्सीनों से अलग बनाती है.

T-cells बनाएगी कोरोना वैक्सीन
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी Astrazeneca के साथ मिलकर यह वैक्सीन तैयार कर रही है. इंसानों पर पहले ट्रायल में पाया गया है कि वॉलंटिअर्स में इसने न सिर्फ ऐंटीबॉडी बल्कि इन्फेक्शन से लड़ने वाले खास वाइट ब्लड सेल्स (White Blood cells) भी विकसित किए जिन्हें T-cells कहा जाता है.

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ये दोनों साथ मिलकर शरीर को सुरक्षा देते हैं. दरअसल, पहले की स्टडीज में यह बात सामने आई है कि ऐंटीबॉडी कुछ महीनों में खत्म भी हो सकती हैं लेकिन T-cells सालों तक शरीर में रहते हैं.

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