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कोरोना से मौत पर मुआवजे की शर्तें:वित्त विभाग ने जारी किया आदेश; कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट अनिवार्य, राशि पर पहला हक मृतक की पत्नी या पति का होगा





कोरोना से मरने वाले सरकारी कर्मचारियों के परिवार को 5 लाख रुपए का मुआवजा कर्मी के पति अथवा पत्नी को दिया जाएगा। वित्त विभाग ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कोविड-19 विशेष अनुग्रह योजना को लागू करने का आदेश जारी कर दिया है।

योजना के मुताबिक मृत कर्मचारी की काेरोना की रैपिड एंटीजन या RT-PCR टेस्ट रिपोर्ट अनिवार्य है। राशि पर पहला हक मृतक की पत्नी अथवा पति का होगा। जिस दिन मौत हुई, उस दिन शासकीय कार्य में कार्यरत होना आवश्यक है। वर्तमान में कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत जिन परिवारों को आर्थिक सहायता प्राप्त करने की पात्रता है, उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

आदेश के मुताबिक परिवार में एक से अधिक सरकारी सेवक के पात्र होने पर प्रत्येक सदस्य के निधन पर अलग-अलग राशि दी जाएगी। काेरोना से मृत सरकारी सेवक को पूर्णकालिक होना चाहिए। अंशकालिक सेवक को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। योजना 1 मार्च 2021 से 30 जून 2021 तक लागू रहेगी।

तो पात्र दावेदारों में बांटी जाएगी राशि
सरकारी कर्मचारी इस अवधि के दौरान कोरोना पॉजिटिव था, लेकिन उसकी मृत्यु योजना अवधि समाप्त होने के बाद संक्रमित होने के 60 दिन के भीतर हो जाती है, तो भी पात्र दावेदार को अनुग्रह राशि की पात्रता होगी।

निगम मंडलों के लिए नियम
निगम - मंडल - राज्य शासन के अधीन निगम और मंडलों और विश्वविद्यालय नियमित, स्थाई, दैनिक वेतन भोगी, संविदा और आउट सोर्स कर्मचारी के मामले में उनके शासी निकाय के अनुमोदन से योजना लागू कर सकते हैं। राशि का भुगतान भी स्वयं की निधि से होगा।

नगरीय निकाय व पंचायत संस्थाएं - यहां कार्यरत नियमित, स्थाई, दैनिक वेतन भोगी, संविदा और आउट सोर्स कर्मचारी के मामले में प्रासकीय विभाग निर्णय लेगा। लेकिन अंतिम स्वीकृति कलेक्टर देंगे।


इन अफसरों को किया गया अधिकृत

  • योजना का लाभ देने के लिए कलेक्टर को अधिकृत किया गया है। कर्मचारी जिस विभाग में कार्यरत था, उस कार्यालय का प्रमुख निर्धारित प्रारुप में अपने अभिमत सहित प्रकरण संबंधित कलेक्टर काे भेजेगा।
  • कार्यालय प्रमुख की मृत्यु होने पर प्रकरण में संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष अनुग्रह राशि स्वीकृत करेंगे।
  • मंत्रालय व विभाग के मुख्यालय में पदस्थ कर्मचारी-अधिकारियों के मामले में प्रकरणों में सामान्य प्रशासन विभाग या विभाग के प्रमुख स्वीकृति देंगे।
  • विधानसभा व उच्च न्यायालय में कार्यरत कर्मचारी-अधिकारी के मामले में विधानसभा के प्रमुख सचिव और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल सक्षम प्राधिकारी बनाए गए हैं।

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