बेतुल कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विजय वर्मा ने बताया कि टिड्डी दल राजस्थान से लगे हुए मध्यप्रदेश के नीमच, उज्जैन, देवास आदि जिलों से होता हुआ हरदा तक आने की जानकारी मिली है। टिड्डी दल समस्त फसलों एवं सभी तरह की वनस्पतियों को व्यापक क्षति पहुंचाता है। आगामी दिवस में इसके बैतूल में भी प्रवेश की संभावना है। उन्होंने सभी किसानों एवं कृषि विभाग के समस्त अधिकारियों से कहा है कि सभी को सचेत रहते हुए प्रबंधन उपाय हेतु तैयार रहना आवश्यक है।
टिड्डी दल का आगमन सामान्यत: शाम को 6 बजे से 8 बजे के बीच होता है एवं रात्रि में यह कीट भारी क्षति पहुंचाता है। अगली सुबह 3 बजे से 7 बजे के बीच यह दूसरे स्थान के लिए प्रस्थान करता है।
इस कीट के आगमन होने पर तेज ध्वनि उत्पन्न करने हेतु थालियां, ढोल, डीजे, टिन के डिब्बे, ट्रैक्टर के साइलेंसर आदि के द्वारा ध्वनि करें। पटाखे फोडक़र भी इनको भगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त रासायनिक कीटनाशक क्लोरोपायरीफॉस (3 मिली/लीटर पानी) या लेम्डासायहेलोथिन (0.5 मिली/लीटर पानी) का छिडक़ाव कर इनको नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. वर्मा ने जिले के किसानों को सलाह दी है कि सजग रहते हुए खेतों की निगरानी करें और वैज्ञानिकों एवं कृषि अधिकारियों के सजीव संपर्क में रहें, जिससे इस कीट के आक्रमण होने पर समुचित प्रभावी प्रबंधन किया जा सके।

