बैतुल जिले की मूलताई तहसील का एक गांव डहुआ जहा बीते करीब सवा सौ साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी गांव की गलियों में गुलाल नहीं उड़ा है। 29 मार्च 2021 दिन सोमवार को जब पूरा देश होली का त्यौहार मना रहा होगा तब डहुआ में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहेगा। उस गांव में होली का रंग बदरंग हो चुका है। गांव वालो को लगता है कि उनके होली अभिशप्त है तभी तो गांव में बच्चे से लेकर बुढ़े तक होली के रंग और बदरंग चेहरे से कोसो दूर है।
होली के रंगो से भरपूर होली का त्यौहार यूं तो देश - विदेश में भी भारतीय और अप्रवासी भारतीय दोनो ही बड़ी धूमधाम से मनाते है। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में स्थित पंवार जाति बाहुल्य इस गांव पिछले 128 सालों से होली नहीं मनाई गई है। यहां होली ना मनाने का कारण हैरान करने वाला है। गांव के जागरूक नागरिको के अनुसार उनके गाँव डहुआ जो मुलताई से छिन्दवाड़ा सड़क मार्ग पर बसा गांव है। यहां पर 128 से अधिक साल बीत चुके है गांव के लोग होली नहीं मनाते है। पूर्ण रूप से साक्षर एवं जागरूक इस गांव में बच्चो से लेकर बूढ़ों तक को सभी लोगो के लिए होली खेलने की मनाही है। ये किसी अंधविश्वास का नहीं बल्कि एक सदी से भी पहले हुए एक निर्णय के पालन के कारण हो रहा है। कहा जाता है कि होली के ही दिन गांव के प्रधान की एक बावड़ी में डूबने से हुई मौत हो गई थी। बस उस घटना के बाद से ही गांव के प्रमुख लोगों ने दिवंगत प्रधान को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए दोबारा कभी होली ना मनाने का निर्णय लिया जो आज तक जारी है।
गामीणो का कहना है कि गांव के बुजुर्गों का कहना है कि अगर होली का पर्व दोबारा शुरू करना है तो पूरे गांव को एकमत होकर फैसला लेना होगा, क्योंकि इस गांव में होली ना मनाने का फैसला एक धार्मिक मान्यता जैसा बन चुका है जिसे बदलना इतना आसान नहीं है। इस परंपरा के चलते गांव के बेंटे एव बेटियां अपने ससुराल में ही होली गुलाल लगाने चली जाती है।
After all, why is Holi not celebrated in this village? A village where Gulal did not fly for a hundred and fifty years. Read the full report to know.

