कुलदीप पहाड़े ....8770400354
बैतूल। जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर स्थित मुलताई अंतर्गत ग्राम बघोली बुजुर्ग के रहने वाले एक युवा सतीश बिंझाड़े जिनका एक पैर नही है, उन्होंने आर्टिफिशियल पैर लगवाया है। जिन्होंने अपनी दिव्यांगता को अपने ऊपर कभी हावी नही होने दिया, उन्होंने उसे हरा कर एक बार फिर से जीवन जीने और जीवन मे जीतने का फैसला किया, वे लगातार विभिन्न जगहों पर पहुच कर पहाड़ो की चोटियों तक चढ़ाई करना और शिखर पर पहुचने के अनुभव को जी रहे है।
अभी हाल ही में सतीश अपने साथियो के साथ महाराष्ट्र के सबसे ऊंचे पर्वत पर अपना परचम लहरा कर लौटे है। आइए जानते है उन्ही से की कैसा रहा उनका यह सफर और आगे उनकी क्या योजना है -
"मैं , सतीश बिन्झाडे, चंद्रशेखर माकोड़े ।
हम दोनो दोस्तो ने अपने आर्टिफिशियल पैर से महाराष्ट्र के सबसे ऊंचे पर्वत पर अपना परचम लहराया!
महाराष्ट्र के नासिक जिले के इगतपुरी तालुका में स्थित माउंट कलसुबाई महाराष्ट्र की सबसे ऊंची चोटी है। 'महाराष्ट्र के एवरेस्ट' नाम से प्रसिद्ध इस चोटी की ऊंचाई समुद्र तल से 1646 मीटर है।
मेरे गृह ग्राम बघौली (बुजुर्ग) तहसील मुलताई जिला बैतूल मध्य प्रदेश से 716 किमी, अपनी बाइक से महाराष्ट्र की सबसे ऊंची चोटी कालसुबाई के लिए पहुंचे दिनांक 29/05/2021 दोपहर 12:15 से ट्रैकिंग की शुरुआत की और लगातार 4:30 घंटे संघर्ष के बाद कालसूबाई के शिखर पर पहुंचे तथा 2 घंटे 30 मिनट में वापस आए। इस समय पर रास्ते में अत्यधिक बारिश एवं मौसम खराब होने के कारण रुक कर एक शेड में खाना बनाया खाना और खाना खाकर पुनः वापस 716 किलोमीटर सफर के लिए निकल गए पूरा सफर करीब 60 घंटे का था।"
सतीश का कहना है कि आप सबके आशीर्वाद और दुआओं की बदौलत ही इस शुरुआती उपलब्धी को पाने मे सफल रहे ! आगे उनका प्लान अब देश भर की दूसरी और ऊंची पहाड़ियों को अपने कदमो से नापते हुए उनकेकी चोटी पर परचम लहराने का है।
सतीश बताते है कि वे बैतूल जिले के दूसरे दिव्यांगों को चलने के लिए प्रेरित करना चाहते है, वे खुद भोपाल मेराथन में 5 किमी की दौड़ लगा चुके है अब जिले में मैराथन का आयोजन करवा कर उसमे भाग लेना चाहते है। ऐसे दिव्यांग जो चलना तो चाहते है लेकिन मनोबल के अभाव में चल नही पाते है उन्हें प्रेरणा दे कर चलने के लिए हौसला देना चाहते है।
हमदर्द न्यूज की ओर से सतीश आपको और आपकी पूरी टीम को बहुत सारी बधाई और आप इसी तरह दूसरी अन्य चोटी पर परचम लहराने के लिए अभी से बेस्ट ऑफ लक। उम्मीद करते है कि महाराष्ट्र के एवरेस्ट खबर की तरह हमे हिमालय की खबर लिखने का मौका भी बहुत जल्द मिलेगा।




