Hope for relief, now before the festival, edible oil will be cheaper, import duty will be drastically cut
सरकार ने सोया तेल और सूरजमुखी तेल की इंपोर्ट ड्यूटी को घटा दिया है.त्योहारों पर खाद्य तेलों की खरीदारी करने वालें ग्राहकों को राहत मिलेगी.
नई दिल्ली 21 अगस्त। आम आदमी को त्योहार से पहले बड़ी राहत मिलते वाली है. केन्द्र सरकार ने त्योहारों से पहले खाने का तेल सस्ता करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने टैक्स घटाने (TAX) का किया ऐलान किया है. बता दें कि पिछले कई महीनों से खाद्य तेल की कीमतों में तेजी (Edible oil price) है और दाम आसमान छू रहे हैं इसलिए दामो को काबू में कर आम आदमी को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है.
सरकार ने सोया तेल और सूरजमुखी तेल की इंपोर्ट ड्यूटी को घटा दिया है. इसे 15 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया है. इसका सीधा मतलब है कि विदेशों से खाने का तेल मंगाना सस्ता हो जाएगा. मौजूदा समय में एक साल में 60,000 से 70,000 करोड़ रुपये खर्च कर 1.5 करोड़ टन खाने का तेल विदेश से खरीदने पड़ते हैं. क्योंकि घरेलू उत्पादन करीब 70-80 लाख टन है. जबकि देश को अपनी आबादी के लिए सालाना करीब 2.5 करोड़ टन खाने के तेल की जरूरत होती है.
सूरजमुखी तेल का आयात रूस और यूक्रेन से होता है
भारत ने पिछले साल 72 लाख टन पाम ऑयल मलेशिया और इंडोनेशिया से आयात किया. 34 लाख टन सोया तेल का आयात ब्राजील और अर्जेंटीना से और 25 लाख टन सूरजमुखी तेल का आयात रूस और यूक्रेन से किया गया. भारत में मलेशिया और इंडोनीशिया दोनों ही देशों से पाम ऑयल का आयात किया जाता है. मांग और आपूर्ति के इस गैप की वजह से घरेलू बाजार में दाम पर असर होता है.
केंद्र सरकार ने आज एक राज्य पत्र जारी कर सोया डीगम और सनफ्लावर पर आयात शुल्क में 7.5 फीसदी कटौती की है इससे आगे त्योहारों के दिन होने के नाते खाद्य तेलों की खरीदारी बढ़ने के चलते ग्राहकों को थोड़ी राहत मिलेगी. लेकिन इस बार सरकार ने इस कटौती कुछ समय के लिए यानी 30 सितंबर तक की है.
‘सरकार का यह कदम जरूरी’
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर का कहना है कि सरकार चाहती तो जैसे आज आयात शुल्क में कटौती की है ऐसे ही इसे कभी भी वापस ले सकती थी लेकिन अवधि दिए जाने से कुछ वर्ग इसका गैर लाभ उठा सकते हैं.
शंकर ठक्कर ने आगे कहा सरकार का यह कदम आवश्यक था हमने काफी समय से इसके लिए सरकार से मांग की थी आज इस मांग को पूरा करने के लिए हम सरकार का आभार जताते हैं और स्वागत भी करते हैं इससे विदेशों में उबल रहे बाजारों पर तो रोक नहीं लगेगी लेकिन घरेलू बाजारों पर असर जरूर से होगा.
ठक्कर बताते हैं कि सरकार द्वारा आयात शुल्क कम किए जाने पर विदेशी निर्यातक देश निर्यात शुल्क पर बदलाव नहीं लाते हैं तो ही घरेलू बाजार को इसका लाभ मिलेगा. शंकर ठक्कर का कहना है कि इस कदम से किसानों को आहत होने की कोई भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि सरकार ने हाल ही में 11000 करोड़ रुपए की योजना लाई है और आगे भी बाजारे अच्छी रहने की ही संभावना है बन रही है.
शंकर ठक्कर ने बताया कि विदेशों से आयात हो रहे खाद्य तेलों में पाम ऑयल की हिस्सेदारी 55 फीसदी है भारत सरकार ने साल 2025-26 तक पाम तेल का घरेलू उत्पादन तीन गुना बढ़ाकर 11 लाख टन करने की लक्ष्य बनाया है.
इसके अलावा राष्ट्रीय तिलहन मिशन पर अगले पांच साल में करीब 19,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है सरकार की यह दोनों योजनाएं सही समय पर कार्यान्वयन होनी चाहिए तो इसका लाभ देश की किसानों को भी मिलेगा एवं देश खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएगा.
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