Remembering the author of the national anthem, Rabindranath Tagore by saluting him on his 80th death anniversary.
पूरे भारत में राष्ट्रगान, राष्ट्र के वैभव, सुख, समृद्धी और सम्मान में गाया जाता है – श्री लीलाधर नागले
आठनेर। हमारे देश का राष्ट्रगान जन- गण- मन है। इस गान के रचयिता रविंद्रनाथ टैगोर को आज उनकी 80वीं पुण्यतिथि पर आठनेर तहसील के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देहगुड़ में सादर श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर शिक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता लीलाधर नागले ने कहा कि रविंद्र नाथ टैगोर असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे जिन्होंने साहित्यिक रचनाएं करके भारत और बांग्लादेश का राष्ट्रगान दिया। इनके साहित्य और लेखन की उत्कृष्ट कृतियों के कारण से एशिया का प्रथम नोबेल पुरस्कार का सम्मान भी उन्हें प्राप्त हुआ है। श्री नागले ने कहा कि पूरे भारत में राष्ट्रगान, राष्ट्र के वैभव, सुख, समृद्धी और सम्मान में गाया जाता है। इस अवसर पर संस्था के प्रभारी प्राचार्य तिलक सोलंकी ने कहा कि टैगोर विश्वविख्यात कवि, दार्शनिक, साहित्यकार हुये इन्हे महात्मा गांधी ने सर्वप्रथम गुरुदेव की उपाधि से नवाजा। आज इस अवसर पर संस्था के शिक्षक और गायक दिलीप कुमार जगताप ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए करूण रस से ओतप्रोत गीत की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर संस्था के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने रवीन्द्र नाथ टैगोर के अतुलनीय योगदान के लिए उन्हे सलामी देकर याद किया गया। आज रवीन्द्र नाथ टैगोर की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करते समय संस्था के प्रभारी प्राचार्य तिलक सोलंकी, लीलाधर नागले, दिलीप कुमार जगताप, मोना सोनी, सरिता नरे, कोेेैशल बारपेटे, रियाज कुरैशी, श्रीधर दाते, प्रफ़ुल्ल जोशी, रामकुमार भरतपुरे, लीलाधर बारस्कर, मारोती बावने, सुरेश धुर्वे, सावनया निरापुरे सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे।


