Tiger hunt: After putting poison on the dead cow, making the lion unconscious, he beat it with sticks and killed it.
मुलताई। रेंज के छिंदवाड़ गांव में दिसंबर 2017 में दो भाइयों ने बाघ का शिकार किया था। इसका खुलासा 29 जुलाई को पांढुर्ना के आरोपी मोतीलाल को बाघ की खाल और पंजे का सौदा करते समय मुखबिर की सूचना पर महाराष्ट्र की बॉर्डर पर पकड़ने के बाद हुआ। आरोपी को नागपुर डिविजन वन मंडल की टीम और छिंदवाड़ा रेंजर की टीम ने पकड़ा था। उसने बताया कि बाघ का शिकार उसके दो भांजों ने किया है। वे ही उसे खाल और पंजे देकर गए थे। इस आधार टीम ने छिंदवाड़ गांव से 31 जुलाई को शिकार करने वाले दोनों भाई रामभाऊ और रामदेव मर्सकोले को पकड़ा। नागपुर वन विभाग और दक्षिण वनमंडल बैतूल की टीम ने आरोपियों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि रामभाऊ और रामदेव मर्सकोले सगे भाई हैं इन्होंने ही बाघ को मारा था। उन्होंने बताया के वे खेत में काम कर रहे थे इसी दौरान पास ही जंगल में उनकी गाय चर रही थी जिसका बाघ ने शिकार कर लिया था। चिल्लाने पर बाघ गाय के शव को छोड़कर चला गया था। दोनों को इस बात की जानकारी थी कि बाघ वापस लौटकर शिकार को खाने आएगा।
गुस्से में दोनों ने गाय के शव पर जहरीला पदार्थ डाल दिया। बाद में बाघ आया और गाय का मास खाने लगा जहर से वह बेसुध हो गया था। इसके बाद दोनों भाईयों ने डंडों से पीटकर उसको मार डाला। इसके बाद उसके पंजे काटकर और खाल उतारकर इसे गड़ा दिए। टीम ने बताया कि दोनों भाई एक-दूसरे पर जहर देने और डंडे मारने की बात कह रहे हैं।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लेब्राडोर प्रजाति का डॉग टीना भिजवाया
स्निफर डॉग टीना को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व ने भेजा। सोमवार को दक्षिण वनमंडल का अमला इस बाघ को गड़ाए जाने की जगह की छानबीन करने के लिए छिंदवाड़ के जंगलों में ले गया। आरोपियों की बताई जगह पर छिंदवाड़ के जंगलों में टीम उन्हें साथ लेकर गई। यहां पर डॉग टीना को पहले खाल सुंघाई इसके बाद उसे दौड़ाया। टीना ने एक जगह पर निशानदेही की यहां काफी गहराई तक खुदाई की तो गाय की हडि्डयां मिली, लेकिन बाघ की हडि्डयां नहीं मिली।
सोमवार को बाघ को मारने वाले दोनों आरोपियों रामभाऊ और रामदेव मर्सकोले को लेकर वन विभाग की टीम बताई गई जगह पर खुदाई के लिए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से बुलाए गए डॉग को लेकर पहुंची थी। डॉग द्वारा सूंघ कर बताई जगह पर खुदाई की तो वहां केवल गाय की हडि्डयां मिली। बाघ की हडि्डयों नामोनिशान नहीं था। जंगल में तीन घंटे तक खुदाई करने के बाद वन विभाग का अमला शाम होते ही वापस लौट आया। आज भी वन विभाग का अमला बाघ के कंकाल की तलाश में जंगल में खोजबीन करने के लिए जा सकता है।
आरोपियों की बताई जगह पर खुदाई में बाघ का अवशेष नहीं मिला
सोमवार को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से डॉग बुलवाया था। इस डॉग की मदद से मुलताई के छिंदवाड़ के जंगल में सोमवार को खोजबीन की। आरोपियों की बताई एक जगह पर जब खुदाई करवाई तो गाय की हडि्डयां मिली। बाघ का कोई अवशेष यहां नहीं मिला। दोनों आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने गाय मारे जाने से नाराज होकर बाघ को मारा था। बाद में खाल मामा को दे थी, जांच जारी है। - पीडी गैब्रियल, डीएफओ, दक्षिण वनमंडल।

