तीवरखेड से 25 किलोमीटर पैदल चलकर फसल बीमा राशि के लिए मुलताई पहुंचे किसानों ने याद दिलाया 12 जनवरी 1998 का किसान आंदोलन
मुलताई गोली कांड के 24 वर्ष बाद फिर से किसान आंदोलन की आहट।
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Multai. मुलताई को पूरे देश दुनिया मे माँ ताप्ती के उद्गम और किसान आंदोलन के लिए खास तौर पर जाना जाता है। 12 जनवरी 1998 को मुलताई में किसान आंदोलन पर हुए गोलीचालन को भी शायद ही कोई भुला होगा, आज भी वह भयानक मंजर लोगो के दिलो को हिला देते है, वर्तमान समय मे मप्र सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाखों किसानों को फसल बीमा की मुआवजा की करोड़ो रूपये की राशि खातों में ट्रांसफर की लेकिन बावजूद इसके मुलताई विधानसभा क्षेत्र के कई गांव ऐसे है जहाँ पूरे के पूरे गांव के किसानों को एक फूटी कौड़ी तक नसीब नही हुई, उनका कहना है कि उनके खेतो में फसलों का नुकसान होने पर भी आंदोलन करने के बाद उनके खेतो का सर्वे करवाया गया था, जिसमे प्रशासन ने 80% अनावारी दर्शायी थी, लेकिन अब जब क्षेत्र के अधिकतर किसानों के खातों में फसल बीमा राशि आ चुकी है उसके बाद भी 19 गांव के किसानो को राशि नही मिली है, शासन इसे तकनीकी त्रुटि बता कर अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है लेकिन वहीं दूसरी तरफ किसानों को बैंक से उठाया गया पैसा वापस करने की अंतिम तारीख नजदीक आने से चिंता होने लगी है। किसानों की यह चिंता धीरे धीरे आंदोलन का रूप लेते नजर आ रही है। आज बुधवार को प्रभात पट्टन ब्लाक के तीवरखेड से सैकड़ो किसान करीब 25 किमी पैदल चल कर मुलताई अपनी समस्या लेकर पहुचे थे जिन्होंने मुलताई नगर स्थित माँ ताप्ती की प्रथम पुलिया पर धरना दे दिया, ट्रैफिक जाम होने से पहले ही पुलिस ने किसानों को आवाजाही के लिए रास्ता छोड़ने का आग्रह किया जिसके बाद आधा मार्ग खुल सका, वहीं किसान तहसील कार्यालय न जा कर अधिकारियों को धरना स्थल पर बुलवा कर तत्काल फसल बीमा राशि दिलाए जाने की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी करते रहे।
किसानों के द्वारा धरना देने की सूचना पाकर मुलताई तहसीलदार सुधीर जैन मौके पर पहुचे और करीब 10 दिन पूर्व किसानों द्वारा दिए गए ज्ञापन पर की गई कार्यवाही की जानकारी देने लगे जिसका किसानों में विरोध करते हुए तत्काल फसल बीमा की मांग पुनः दोहराई और मौके पर अनुविभागीय अधिकारी को बुलाने के लिए कहा।
किसानों के आंदोलन को देख मौके पर अनुविभागीय अधिकारी हरसिमरन प्रीत कौर पहुची उन्होंने आगामी 20 मार्च तक सभी को सफल बीमा राशि दिलवाने का आश्वासन दिया जिसके बाद ही किसानों का गुस्सा शांत हुआ और किसानों में अपना धरना करीब एक घण्टे बात समाप्त किया लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दे दी कि यदि 20 मार्च तक फसल बीमा राशि प्राप्त नही हुई तो इससे बड़ा किसान आंदोलन होगा और अबकी बार पैदल जिला मुख्यालय तक जा कर जिला कलेक्टर के सामने धरना दिया जाएगा।
आज मुलताई में हुए इस किसान आंदोलन ने 12 जनवरी 1998 को हुए किसान आंदोलन की याद ताजा कर दी और यह साफ कर दिया कि किसान अपने हक और अधिकारियों के साथ साथ अपने खून पसीने की कमाई के लिए फिर से किसी बड़े आंदोलन को अंजाम दे सकते है।

