खास रिपोर्ट। आपको बता दे यह घटना हाओ 25 मई 2020 की। यह 25 मई जॉर्ज के लिए मनहूस दिन था। किसी अज्ञात व्यक्ति ने पुलिस को फ़ोन कर शिकायत की कि उसे किसी व्यक्ति पर शक है, वह 20 डॉलर के जाली नोट से भोजन खरीद रहा है। पुलिस टीम पांच मिनिट पर बताए स्थान पर पहुंच गई।
पुलिस ऑफिसर डेरेक चौविन की नजर जॉर्ज पर पड़ी जो भोजन खरीद कर खा रहे थे। फ़ूड स्टोर पर अन्य लोग भी भोजन खा रहे थे लेकिन शक़ के आधार पर सिर्फ जॉर्ज को हाथ ऊपर करने को कहा गया, जॉर्ज कुछ समझ नही पाए। जार्ज कुछ समझ पाते उसके पहले ही उसे धर दबोचा गया।
तीन पुलिस अफसरों ने जॉर्ज को ज़मीन पर पटक दिया, जिसमे से एक पुलिस अफसर डेरेक चौविन ने अपना बायां पैर जॉर्ज की गर्दन पर रख दिया। कुल 8 मिनिट तक डेरेक चौविन ने जॉर्ज की गर्दन पर पैर रखा रहा। जॉर्ज चिल्लाते रहे मुझे छोड़ दो, I can't breath... मैं सांस नही ले पा रहा हूँ, मैं सांस नही ले पा रहा हूँ... जॉर्ज तड़पते रहे लेकिन नस्लभेद का पैर उनकी मौत के बाद गर्दन से उठा।
46 वर्षीया जॉर्ज फ्लॉयड ब्लैक अफ्रीकन अमेरिकन समुदाय से हैं। इसी ब्लैक अफ्रीकन अमेरिकन समुदाय ने अपने श्रम उत्पादन मेहनत से अमेरिका को बसाया, विकसित अमेरिका बनाया।
जॉर्ज 6 और 22 वर्षीया दो बेटियों के पिता हैं। परिवार की पूरी जिम्मेदारी बखूबी संभालते थे। मिन्नेसोटा राज्य के मिन्नेपोलिस शहर के रेस्टोरेंट में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते थे। रेस्टोरेंट मालिक के अनुसार जॉर्ज बेहद मेहनती थे अपने काम को पूरी इमानदारी से करते थे।
जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद पूरे अमेरिका में "आई कांट ब्रीथ" के नाम से प्रदर्शन हो रहे है। गोरा काला हर चमड़ी का रंग विरोध प्रदर्शन में नजर आ रहा है। हर अमेरिकन सवाल कर रहे है क्या नस्लभेद का पैर किसी व्यक्ति की मौत तय करेगा।
इस घटना के बाद हो रहे जोरदार विरोध प्रदर्शन से अमेरिका ने साबित कर दिया कोरोना से ज्यादा खतरनाक नस्लवाद है, और अब अमेरिकन नस्लीय हिंसा और असमानता की मानसिकता को बर्दाश्त नही करेंगे।

