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16 साल बाद बहन को मिला उसका खोया हुआ भाई

चंदा रे मेरे भैया से कहना बहना याद करे। 16 साल बाद बहन को मिला उसका खोया हुआ भाई  ।


बैतूल - आपको 1960 की दशक की फिल्मे याद होगी जिसमें कुंभ के मेले में बिछड़े भाई - बहन बारह साल बाद कुंभ के मेले में ही मिलते है, लेकिन चार बहनो को उसका भाई 12 नहीं बल्कि पूरे 16 साल बाद मिला। अंजू बाई पटेल यूं तो कटनी की रहने वाली है लेकिन उसकी जिदंगी में बैतूल जिला मुख्यालय में पदस्थ डी एस पी सुश्री पल्लवी गौर ( महिला थाना डेस्क) का सरकारी वाहन चालक श्री बी के आरसे (प्रधान आरक्षक मघ्यप्रदेश पुलिस) उस ईद के चांद की तरह खुॢशयों की सौगात लेकर आया जिस चांद से वह हर साल राखी पर कहती थी कि चंदा रे मेरे भैया से कहना बहना याद करे.....

सतपुड़ाचंल में बसे आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिला मुख्यालय पर कोरोना कफ्र्यू के दौरान बुधवार 12 मई 2021 को राजा भोज मार्ग (चक्कर रोड़) पर  डी एस पी सुश्री पल्लवी गौर ( महिला थाना डेस्क) का सरकारी वाहन चालक श्री बीके आरसे की मुलाकात एक  एक 45 साल के शख्स से जब श्री बीके आरसे ने जब उससे बातचीत की तो पता चला कि वह कटनी जिले का रहने वाला है। श्री आरसे भी कटनी के आसपास के रहने वाले थे। उससे थोड़ी और पुछताछ की तो उसके पास एक कागज में उसका नाम और पता लिखा मिला। जिसकी तस्दीक करने पर पता चला कि वह तो बीते 16 साल से गायब है। जब उसकी तस्वीर उसके परिजनो तक भेजी गई तो उसकी बहनो ने उसे पहचान लिया। पुलिस तो पुलिस ठहरी इतनी जल्दी कोई निर्णय पर पहुंच नहीं सकती। गुमशुदा व्यक्ति की बहन श्रीमति अंजू पटेल ने बताया कि उसके भाई सुकविंद उर्फ सुरेश पटेल के पांव की दो ऊंगलिया कटी हुई है। अब पुलिस को पूरा यकीन हो चुका कि कटनी जिले के जोबा गांव का निवासी सुकविंद उर्फ सुरेश पिता आधान पटेल ही वह व्यक्ति है जो ससुराल वालो की प्रताडऩा के चलते जान बचा कर गांव छोड़ कर बैतूल आ गया और उसके बाद परिवार को खोने का सदमा उसे इस कदर तोड़ दिया कि उसने बीते 16 सालो में न तो गांव का न लिया और न किसी को कुछ बताया। मध्यप्रदेश के कटनी जिला की ग्राम पंचायत जोबा गांव के सचिव को फोटो भेजी गई तो पता चला कि यह व्यक्ति 2004 से लापता है । सुरेश की फोटो जब परिजनों को दिखाई गई तो वह उसे पल में पहचान गए। और आज उसकी बहन अंजू उसे लेने बैतूल पहुंची तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा ।



16 साल से भटक रहा है बैतूल की सड़को पर

कटनी जिले का रहने वाला यह व्यक्ति 2004 में बैतूल बाजार स्थित बालाजीपूरम आया था उसके बाद से वह गांव वापस नहीं लौटा। हालांकि उसे अपने घर का पता पूरी तरह याद था लेकिन वह अपने ससुराल पक्ष की प्रताडऩा को नहीं भूल सका और जान से हाथ न धो बैठे इस डर से वह 2004  में गांव छोड़ कर बैतूल आ गया था। 

ससुराल से झगड़े के बाद बिगड़ा मानसिक संतुलन

बताया गया है कि 2004 में सुरेश अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ रहता था, लेकिन ससुराल वालों से रुपयों के लेन - देन के चलते उसका झगड़ा हो गया। इस घटना के बाद वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठा और घर से निकल गया। बहनो ने अपने भाई को बहुत ढूंढने का प्रयास किया, लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी सुरेश का पता नहीं चल सका। इधर बैतूल की सड़कों पर गुमनामी के अंधेरे में भटक रहे सुरेश को अपने गांव के सिवा कुछ याद नहीं था। उसकी पत्नि एवं बच्चो ने उसे मृत समझ कर उसे भूल गए। आज जब उसके जीवित होने की खबर मिली तो उसे लेने सिर्फ बहन एवं दामाद बैतूल आए। 


बाईट श्रीमति अंजू पटेल (छोटी बहन)

बाईट. पल्लवी गौर (डी एस पी महिला डेस्क बैतूल)

पंजाब केसरी के लिए बैतूल से रामकिशोर पंवार की रिर्पोट

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