काला गेंहू इन दिनों पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। जैसे कि नाम से ही पता चलता है कि काले रंग का गेहूं है, लेकिन आप इसके रंग पर मत जाइए। यह गेहूं गुणों की खान है। आइए जानते है इसके बारे में पूरी बाते।
काला गेंहू अन्य गेंहू की तरह ही गेंहू की एक नई उन्नत किस्म है। इस गेहूं को पंजाब के भटिंडा से बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र अंतर्गत चन्दोरा कला के किसान यादोराव बरोदे लेकर आए है। उन्होंने बताया कि यह काला गेहूं सामान्य गेंहू से ज्यादा गुणकारी है। इसमें पौष्टिक तत्व जैसे कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, जिंक, आयरन आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते है।
काला गेहूं कई प्रकार के शारीरिक रोगो को भी दूर करने में सक्षम माना गया है। यह मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। इसके सेवन से मोटापा, डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारी तक ठीक हो चुकी है।
हालांकि इसकी रोटियां हल्के भुरे रंग की होती है, लेकिन खाने में स्वादिष्ट होती है। इसकी पैदावार भी सामान्य गेंहू की तरह ही होती है, लेकिन यादोराव जी का मानना है कि यदि मेहनत और की जाए तो पैदावार बढ़ सकती है।
यादोराव जी मे बताया कि उन्होंने मात्र 70 किलो काला गेहूं पंजाब से लाया था। जिसमे से 30 किलो दूसरे किसानों को बोने के लिए दे दिया और 40 किलो उन्होंने खुद अपने आधे एकड़ खेत मे बोया था। उन्होंने बताया कि उनने सामान्य गेहूं की तरह ही तैयारी करके इस गेहूं को बोया था। जिसमे 2115 किलो गेंहू का उत्पादन उन्हें मिला। जो कि सामान्य गेहूं के जैसा ही था।


