किसान संघर्ष समिति ने मजदूर किसान एकता दिवस के रुप मे मनाई संत रविदास जयंती और चंद्रशेखर आज़ाद स्मृति दिवस।
मूलताई। आज अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति एवं संयुक्त किसान मोर्चा के आव्हान पर किसान संघर्ष समिति कार्यालय मुलताई में किसंस के जिलाध्यक्ष जगदीश दोड़के की अध्यक्षता में किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष, पूर्व विधायक डॉ सुनीलम एवं उपाध्यक्ष एड. आराधना भार्गव की उपस्थिति में मजदूर किसान एकता दिवस मनाया गया ।इस अवसर पर डॉ सुनीलम ने मुलतापी के रविदास मंदिर पहुंचकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
किसंस कार्यालय में गुरु रविदास जी की जयंती एवं शहीद चंद्रशेखर आजाद स्मृति दिवस पर उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की गई ।
मजदूर -किसान एकता दिवस पर बैठक को संबोधित करते हुए डॉ सुनीलम ने कहा कि यह देश मूर्तिपूजक देश है तथा लोगों को महापुरुषों की फोटो दीवार पर टांगकर रस्म निभाने की आदत है। उन्होंने कहा कि रविदास जी अपने जीवन में कर्म को प्रधानता देते थे। उन्होंने जन्म के आधार पर किए जाने वाले भेद का विरोध किया और श्रमिकों को प्रतिष्ठा दी।
डॉ सुनीलम ने कहा कि उनका मन इस बात को लेकर आक्रोशित है कि अभी भी गांव में दलितों के साथ भेदभाव किया जाता है।
डॉ सुनीलम ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने देश को आजाद कराने की लड़ाई लड़ते हुए कुर्बानी दी थी लेकिन भाजपा की केंद्र सरकार देश के लोगों को अडानी-अंबानी की गुलाम बनाना चाह रही है।
डॉ सुनीलम ने किसानों से तीनों किसान विरोधी कानून रद्द कराने, सभी उत्पादों की लागत से डेढ़ गुना दाम पर खरीद की कानूनी गारंटी देने, श्रम विरोधी 44 श्रम कानूनों को बहाल कराने के लिए संघर्ष में शामिल होने की अपील की।
किसान संघर्ष समिति की उपाध्यक्ष एड आराधना भार्गव ने कहा कि गुरु रविदासजी ने सदैव ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाने का प्रयास किया। उनके भजन देशभर में गाए जाते हैं।
किसंस जिलाध्यक्ष जगदीश दोड़के ने कहा कि रविदास जी ने जीवन भर समाज में फैली कुरीति जैसे जात- पात के अंत के लिए काम किया। इसी दर्शन को समझकर गांधी जी ने पारंपरिक हथकरघा तथा कुटीर उद्योग को महत्व दिया।
एड दयानंद वर्मा ने कहा कि संत रविदास जी ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने भगवान की भक्ति में समर्पित होने के साथ-साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्तव्यों का भी निर्वहन किया।
किसंस के महामंत्री कृष्णा ठाकरे ने रविदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गरीबी, बेकारी और बदहाली से मुक्ति के लिए उनका श्रम और स्वावलंबन का दर्शन आज भी कारगर है।
कुलदीप पहाड़े ने कहा कि रविदासजी ने लोगों को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने की शिक्षा दी, और इसी तरह से वे भक्ति के मार्ग पर चलकर संत रविदास कहलाए।
आष्टा से इंदलराव खातरकर ने कहा कि रविदासजी उन चुनिंदा महापुरुषों में से एक है जिन्होंने अपने रूहानी वचनों से सारे संसार को एकता, भाईचारा पर जोर दिया।
मजदूर -किसान एकता दिवस पर प्रेमचंद मालवीय,लक्ष्मण बोरबन, डखरू महाजन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर गुलाब देशमुख सीताराम नरवरे , अशोक बरोदे, तीरथसिंह बलिहार,भागवत परिहार, मुकुंद परिहार, मोतीराम चौहान गुलाबचंद नरवरे, माखनलाल नरवरे आदि उपस्थित हुए।
Kisan Sangharsh Samiti celebrated Sant Ravidas Jayanti and Chandrashekhar Azad Memorial Day as Mazdoor Kisan Ekta Diwas


