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इस्लामी आतंकवाद को इस्लाम का ही एक रूप बताने पर 12वीं की किताब पर बवाल। पब्लिशर के ऑफिस पर हमला। पढ़िए विस्तार से क्या है पूरा मामला।

इस्लामी आतंकवाद को इस्लाम का ही एक रूप बताने पर 12वीं की किताब पर बवाल। पब्लिशर के ऑफिस पर हमला।

 
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक किताब के विवादित कंटेंट के खिलाफ समुदाय विशेष के लोगों ने पब्लिशर के ऑफिस पर हमला कर दिया। जयपुर के चारदीवारी में स्थित संजीव पब्लिकेशन पर हमला बुधवार दोपहर को हुआ। ये हमला एक किताब में इस्लामिक आतंकवाद पर छापे गए एक चैप्टर से खफा होकर किया गया। हमलावरों ने ऑफिस में रखा फर्नीचर तोड़ दिया और वहां रखी दूसरी किताबों को भी फाड़ दिया। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची, लेकिन उससे पहले ही हमलावर वहां से चले गए।


हमलावरों ने ऑफिस में तोड़फोड़ करने के बाद कुछ किताबें फाड़ दी और कुछ लूट लीं। इसके बाद ऑफिस के बाहर आकर हमलावरों ने किताबें फाड़कर उन्हें जला दिया और उसका वीडियो भी बनाया। पब्लिशर के मैनेजर विजय शंकर शुक्ला ने बताया कि 12वीं कक्षा की राजनीतिक विज्ञान की एक किताब में इस्लामिक आतंकवाद के सवाल पर एक जवाब छापा गया था। यह सवाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की किताब में भी पूछा गया है।

किताब में छपे जिस सवाल पर हुआ विवाद, उसमें क्या है..

सवाल: इस्लामी आतंकवाद से आप क्या समझते है?

जवाब: इस्लामी आतंकवाद इस्लाम का ही एक रूप है, जो विगत 20-30 वर्षों में अत्यधिक शक्तिशाली बन गया है। आतंकवादियों में किसी एक गुट विशेष के प्रति समर्पण का भाव नहीं होकर एक समुदाय विशेष के प्रति समर्पण भाव होता है। समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता इस्लामिक आतंकवाद की मुख्य प्रवृत्ति है। पंथ या अल्लाह के नाम पर आत्मबलिदान और असीमित बर्बरता, ब्लैकमेल, जबरन धन वसूली, और निर्मम नृशंस हत्याएं करना ऐसे आतंकवाद की विशेषता बन गई है। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पूर्णतया धार्मिक व पृथकतावादी श्रेणी में आता है

आपत्ति के बाद किताब से कंटेंट हटाया था
मैनेजर ने बतायाय कि कुछ समय पहले जब इस सवाल के जवाब पर आपत्ति आई, तो हमने अपनी तमाम पुस्तकें बाजार से वापस उठा ली थीं और नई किताबों से भी उस कंटेंट को हटा दिया था, ताकि किसी की धार्मिक आस्था को ठेस न पहुंचे। हालांकि, इस सवाल का जवाब दूसरे पब्लिशर्स की किताबों में भी इसी तरह दिया गया है।

3-4 दिन पहले आए थे धमकी भरे फोन
शुक्ला ने बताया कि आपत्ति के बाद पब्लिश किया गया कंटेंट हटाने के साथ ही लिखित में माफी भी मांग ली थी। उसके बावजूद 3-4 दिन पहले कुछ लोगों के फोन आए और उन्होंने इस मामले पर हमें धमकाया। इसकी शिकायत हमने पुलिस कोतवाली में भी की, जहां से हमारी सुरक्षा के लिए 2-3 जवान भी उपलब्ध करवाए गए। दोपहर करीब 3 बजे 4-5 लोग ऑफिस आए और यहां तोड़फोड़ शुरू कर दी। लगभग 30-40 लोग ऑफिस के बाहर भी खड़े थे। विरोध करने आए लोगों ने फर्नीचर नीचे गिरा दिया और यहां पड़ी किताबें फाड़ दी। इस मामले में पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।

किताबों को 2017 में छापा गया था
यह मामला 2017 का है। यानी पब्लिशर ने 2017 में जो किताब प्रकाशित की थी, उसमें यह जवाब छापा था। 3 साल से भी ज्यादा समय बाद पब्लिशर के ऑफिस पर हमला हुआ है। पब्लिशर की शिकायत के बाद पुलिस की सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। बुधवार को जब हमला हुआ, तब भी 3 पुलिसकर्मी ऑफिस में मौजूद थे। इसके बावजूद लोग वहां आए और हमला कर दिया।



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