गायों की दुर्दशा:गौशालाएं खोल दीं, मवेशी भी पहुंच गए लेकिन इलाज नहीं, 6 माह में 137 गायों की मौत।
दमोह। जिले में 21 गौशालाएं बन चुकी हैं, इनमें से 17 का संचालन भी शुरू हो गया है। 12 गौशालाएं पूर्व से संचालित हैं। 33 गौशालाएं और स्वीकृत हो गई हैं। जिले में बनी प्रत्येक गौशाला पर 27 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हुआ है। नई गौशालाएं जो स्वीकृत हुई हैं उनकी प्रत्येक की लागत 37 लाख से ज्यादा है। सरकारी आंकड़ों में ही गायों का संरक्षण हो रहा है। हकीकत में गौशालाएं दुर्दशा का शिकार हैं।
जिले की गौशालों में 5752 गौवंश हैं। हर महीने प्रत्येक गौशाला में 2 से 3 गायों की माैत हो रही है। पिछले छह माह की बात करें तो 137 गायों की मौत हो चुकी है। इनकी मौत की वजह गौशालाओं में साफ सफाई न होना, बीमार और स्वस्थ गायों को एक ही शेड में रखना है। न तो अधिकारी नियमित दौरा करते हैं न ही गायों को चारा भूसा ठीक से दिया जा रहा है। भास्कर ने जब इन गौशालों के अंदर की हकीकत जानी तो चौकाने वाली स्थिति सामने आई।
बजट भी बढ़ाया; 20 रुपए प्रति गाय के हिसाब से आता है बजट
वेटरनरी विभाग के अधिकारियों की मानें तो जिले में दो तरह की गौशालाएं हैं। मुख्यमंत्री गौशाला योजना के तहत 2019 में 21 स्वीकृत हुई थीं 17 का संचालन शुरू हाे गया है। इसके अलावा 12 गौशालाएं जाे पूर्व से स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित की जा रही हैं। 2020 में 33 और गौशालाएं स्वीकृत हुई हैं। गौशालाओं के लिए जून 2020 से फंड नहीं दिया गया है।
वर्ष 2018-19 में भाजपा की सरकार थी तब 5 रुपए एक पशु के हिसाब से प्रतिदिन का दिया जाता था, कमलनाथ सरकार ने 20 रुपए प्रतिदिन प्रति पशु कर दिया। जून 2020 तक पैसा मिला। जिले की 17 गौशालाओं में लगभग 1600 गौवंश हैं। इनका संचालन एनआएएलएम आजीविका मिशन के स्वसहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है।

