विस्थापित ग्राम बोरगांव में अव्यवस्थाओ का अंबार, न स्ट्रीट लाइट न पीने के पानी का इंतज़ाम। सड़क पर मवेशी और कचरे का ढेर।
✍️कुलदीप पहाड़े . . .
मुलताई। ग्राम पंचायत बोरगांव विकास खण्ड प्रभात पट्टन में नदी के किनारे बसे बोरगांव को डेम के कारण पुनर्वास किया गया था। पुर्नवास के समय जहा गांव बसाया गया वहां सभी सुविधाएं दिलाने का आश्वासन दिया गया था लेकिन कुछ सालों में ही हाल बद से बदतर हो गए। गांव में जहां स्ट्रीट लाइन पहले चालू थीं अब इस पर ग्राम पंचायत ध्यान नहीं दे रही है, जिसके चलते लाइट बंद है, बताया गया कि लाखों रुपए बिजली बिल बकाया होने के कारण लाइट बंद कर दी गयी, लाइट बंद होने से पूरा गांव अंधेरे में डर के साए में रहने को मजबूर है। दूसरी तरफ वही गांव की सड़क पर ही ग्रामवासी अपने मवेशी बांध देते है, जिससे लोगो को आवागमन में दिक्कत होती है । इसके अलावा सड़क किनारे कचरा डाल कर घुडे बना दिया गया है। जिससे कोरोना काल में भारत स्वच्छ अभियान के तहत कोई साफ सफाई नहीं होती और रोड पर ही ग्राम पंचायत वालो ने पाइप लाइन के काम के गड्डे बहुत महीनो से खोद के रखे है लेकिन उसका काम भी नही किया और ध्यान भी नही दे रहे। कुलमिला कर पुर्नवास के बाद गांव की सूरत बद से बदतर होते जा रही है। भीम आर्मी के जिला कोषाध्यक्ष जितेंद्र कापसे द्वारा बताया गया कि यही हाल रहा तो गया गांव में रहना भी दूभर हो जाएगा।



