MP निकाय चुनाव में रिजर्वेशन पर दूसरा स्टे: 3 माह चुनाव टलना तय:इंदौर हाई कोर्ट में नगरी निकाय चुनाव आरक्षण को लेकर दायर की गई थी याचिका।
इंदौर। इंदौर हाई कोर्ट ने भी नगर निकाय चुनाव आरक्षण को लेकर जारी नोटिफिकेशन को लेकर दायर याचिका पर स्टे दे दिया है। इसके पहले हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 2 नगर निगम सहित 81 निकायों के महापौर-अध्यक्ष पद के आरक्षण पर रोक लगा दी थी। कोर्ट का कहना है कि यहां बार-बार एक ही वर्ग के लिए आरक्षण करना अन्य वर्ग को चुनाव से वंचित रखना है। आरक्षण में रोटेशन प्रक्रिया को फॉलो किया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट अधिवक्ता भास्कर अग्रवाल ने बताया कि नगर निकाय चुनाव में आरक्षण प्रक्रिया को लेकर एक याचिका दायर की गई थी। यह याचिका पार्षद नरोत्तम चौधरी और पूर्व पार्षद सुरेंद्र कुमार ने लगाई थी। याचिका में कहा था कि नगर निकाय चुनाव में जिन सीटों के लिए आरक्षण किया गया है, उनमें रोटेशन बिल्कुल भी नहीं है। आरक्षण डिक्लियरेशन लंबे समय से वही चला आ रहा है। जैसे कोई सीट लंबे समय पहले SC या ST के लिए आरक्षित की गई थी तो वह अब तक उसी वर्ग के लिए आरक्षित है, जबकि संविधान के अनुसार रोटेशन प्रक्रिया को अपनाया जाना चाहिए। ऐसा करने से हर वर्ग को लाभ मिल सकेगा। ग्वालियर कोर्ट के आदेश के अनुसार ही इंदौर कोर्ट ने भी आरक्षण को लेकर स्टे दिया है। कोर्ट ने रोटेशन प्रक्रिया लागू करने को कहा है।
इंदौर महापौर पद अनारक्षित
नगर निगम चुनाव के लिए कुछ महीनों पहले 85 वार्डों की आरक्षण प्रक्रिया पूरी की गई थी। 85 वार्डों में से 42 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए थे। अनुसूचित जनजाति के लिए 3, अनुसूचित जाति के लिए 13 और OBC के लिए 21 वार्ड आरक्षित हुए थे। वहीं, इस बार महापौर अनारक्षित वर्ग का होगा।

