मध्यप्रदेश के राजगढ़ में कोरोना से अप्रैल व मई माह के 45 दिनों में लगभग 70 से अधिक शिक्षको की मौत होने का मामला सामने आया है। 10 अप्रैल के बाद कोरोना वायरस का राजगढ़ जिले में बड़ा कहर देखने को मिला। जहां देखते ही देखते सैकड़ों लोग इस वायरस के संक्रमण की चपेट में आ गए। इसका असर सबसे ज्यादा किसी विभाग यह संगठन पर पड़ा है तो वह है शिक्षा विभाग। जहां कोरोना काल में करीब 45 दिन के अंदर 70 से अधिक शिक्षकों की जान चली गई।
एक के बाद एक शिक्षक घर में या विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराते दुनिया छोड़ गए। अध्यापक संगठन राजगढ़ जिला अध्यक्ष भगवान सिंह राणावत की माने तो राजगढ़ में 90% शिक्षकों की मौत कोरोना से हुई है। शिक्षकों की मौत की वजह वह मध्यप्रदेश शासन की योजना को बता रहे है। उनकी माने तो मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पिछले वर्ष लागू की गई हमारा घर, हमारा विद्यालय योजना शुरू की गई थी। जिसके तहत शिक्षक घर घर जाकर बच्चों को पढा रहे थे। आरोप है कि उसी योजना के कारण लोगों के सम्पर्क में आने के कारण अधिकांश शिक्षक संक्रमित हुए थे, जिसकी वजह से उनकी मौत हुई है।
यही कारण है कि अध्यापक संगठन के राजगढ़ जिला अध्यक्ष भगवान सिंह राणावत के द्वारा शिक्षकों की जा रही जान को लेकर मृतक शिक्षकों को कोरोना योद्धा के रूप में मानने व 50 लाख की सहायता व अनुकम्पा नियुक्ति मृतक शिक्षक के परिवार को मिले, इसकी मांग कर रहे है।
जिला शिक्षा अधिकारी भगवान सिंह बिसोरिया ने बताया कि जिन शिक्षकों की मौत हुई है उनको सरकारी मदद जो शासकीय सुविधा हैं उसके लिए हम मॉनिटरिंग कर रहे हैं। और वह सुविधाएं उनको दिलवा रहे हैं। जहां तक के कोरोना योद्धा वाली बात है वह शासन को निर्णय लेना है। अगर शासन निर्णय लेगा तो वह भी दिलवा देंगे।

