संकट के समय पाढर अस्पताल के द्वारा जिम्मेदारियों एवम् संवेदना के साथ और जिले में सबसे सस्ता इलाज करने पर लगातार जनता द्वारा सराहा जा रहा था। जो शायद किसी को तो बुरा लग रहा था। इसीलिए बिना सच्चाई जाने जागरण में छपे लेख में पाढर अस्पताल पर 2 रेमडिसवीर इंजेक्शन का 28000 रुपए लेना बताया गया था जिससे की अस्पताल की साख को अच्छा काम और सेवा करने के बावजूद बदनाम करने की कोशिश की गई। व्यक्तिगत पता करने पर पाया गया है, कि शिकायत कर्ता द्वारा शरारत पूर्ण तरीके से जानबूझ कर ये खबर छप वाई है। जबकि अत्यंत गंभीर स्तिथी में भर्ती हुए मरीज़ को आकस्मिक और ट्वरित उच्च कोटि का इलाज दिया गया,और कुल बिल लगभग 50हजार ही आया था। 1 रिमडीसिविर इंज 4000 का लगा। जिसको जोड़कर 14000 बनाया गया साफ दिखता है। मै ऐसे काम की घोर निन्दा करता हूं। और शासन से निवेदन करता हूं कि जांच कर ऐसे शरारतपूर्ण तरीके से किसी संस्था को बदनाम करने वाले गैर जिम्मेदार लोगो और अखबार पर कार्यवाही करें।
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