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मंहगाई जल्द कम नहीं हुई, तो बिगड़ेंगे हालात - जिला समन्वयक कांग्रेस स्पेंसर लाल

Betul humdard news

If inflation does not come down soon, the situation will worsen - District Coordinator Congress Spencer Lal




जिस तेज़ी से पेट्रोल और डीजल के दाम निरंतर बड रहे है,और corona से हुए lockdown में घरों में बंद रहे लोग आज जब बाजार में घूम रहे तो लगभग 2महीनों के बाद की बाज़ार मूल्य सुनकर अवाक हो गय है।अगर लोगो के जीवन में  इतनी कमाई हो के केवल परिवार को खिला सके तो धीरे धीरे व्यक्ति कर्ज के बोझ से दब जाएगा। और फिर जीविका चलाना मुश्किल हो जाएगा। राज्य सरकार मुजबुर है, क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार गले तक कर्ज में डूबी हुई है,उनका ज्यादातर खर्चा शराब और पेट्रोल डीजल के वेट से चल रहा है, सरकारी महकमे में कार्यरत कर्मचारियों की तंखा तक से पैसे वसूले जा रहे है। बहाना है कोरोना काल,  बरहाल वजह सरकार कुछ भी गिनाए, लेकिन अगर सरकार ने पेट्रोल डीजल के रेट कम नहीं किया तो मेहंगाई और उचाई को छू लेगी जिससे लोगो का जीना दूभर हो जाएगा। भाजपा की सरकार कच्चे तेल के भाव कम होने पर भी टैक्स कम नहीं कर रही है, यही दर्शाता है कि सरकार असंवेदनशील हो चुकी है। धारा 144लगा कर जनता द्वारा व्यापक विरोध और आंदोलन ना हो इंतजाम भी कर रही है। जिस हिसाब से पेट्रोल और डीजल को खुली छूट मिली हुई है,वैसे या मेहंगाई के अनुपात में दैनिक भत्ता या मजदूरी भी बढ़ती तो शायद उतना फरक नहीं पड़ता। परंतु मजदूरी जस की तस और वस्तुओ के दाम निरंतर बढ़ रहे है, और सरकार राजस्व बढता ही जा रहा है और जनता कंगाल होती जा रही है। कुछ समय के लिए ही सही, सरकार को अतिरिक्त कर जैसे जीएसटी लेना बंद कर देना चाहिए। ताकि लोग भूखे ना रह सके।   2014 तक तीस करोड़ लोग गरीब थे और सरकारी राशन पर निर्भर थे। परंतु सात सालों में यही गरीब आंकड़ा 80करोड़ गरीब पहुंच गया हैं। ये आंकड़े खुद सरकार बता रही है,की उसने इतने लोगो को राशन बाटा है। 

अब दो ही रास्ते है, या तो सरकार  टैक्स तुरंत काम करके जनता को थोड़ी बहुत राहत पहुचाए, या फिर लोगो को कम खाना खाने पर मजबुर करें और योगा की ओर ले जाकर वाहवाही लूट ले, की भारतीय बहुत मोटे हो गए थे, और मोदी सरकार ने उन्हें पतला कर राष्ट्रहित में कार्य किया। बहुत सी दुकानें तो एमआरपी से भी ज्यादा पैसे वसूलने लगेगी, क्योंकि बा मुश्किल से बहुत दिनों के बाद खुलने वाली दुकानों अपना घाटा पूरा करने की कोशिश इन्हीं मजदूरों से करने की पूरी कोशिश करेगी। बाज़ार पर नजर रखने वाले भी बिकना शुरू कर देंगे,और कोई शिकायत मिलने पर कार्यवाही करने से ज्यादा उन्हे संरक्षण देने में लग जायेगे। जैसे बीते माह में इलाज के दौरान मुंहमांगी कीमत वसूली जा रही थी,और शिकायत मिलने पर बचाया गया। आनेवाले समय बहुत ही खराब होगा अगर मेहंगाई पर अंकुश नहीं लगा तो बेरोजगार बैठे युवाओं पर बहुत गहरा असर पड़ेगा, परिवारों में रोज़ झगड़े बढ जाएंगे, लूटमारी बढ़ेगी।तरह तरह के अपराध जीने की कोशिश के लिए बढ़ेगी। अभी भी समय है, इससे पहले कि हालात ज्यादा बिगड़े सरकार को तुरंत राहत देते हुए, अपनी और से पहल करनी चाहिए, केंद्र और राज्य दोनों को अपनी अपनी  हिस्से के टैक्स कम करके जनता को राहत देते हुए संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए।

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