बैतूल। श्री ओम चिकित्सालय भारत भारती गरीब मरीजों के लिए वरदान साबित हुआ है। जिन निजी अस्पतालों में इलाज का भारी भरकम बिल चुकाने के बाद भी मरीज ठीक नहीं हुए। ऐसे मरीजों को श्री ओम चिकित्सालय ने नि:शुल्क इलाज करके ठीक कर दिया। हम बात कर रहे है बगडोना की रहने वाली 55 वर्षीय सुमित्रा चिकाने की। सुमित्रा कोरोना की चपेट में आ गई थी और हालत बिगडऩे पर पहले घोड़ाडोंगरी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां और ज्यादा हालत गंभीर हो गई। इसके बाद 26 अप्रैल को बैतूल के एक निजी अस्पताल में सुमित्रा को भर्ती किया, जहां 13 दिन भर्ती रहने के बाद सुमित्रा की हालत सुधरने की जगह बिगड़ गई। इन 13 दिनों में अस्पताल का बिल 3 लाख रूपए हो गया था, जिसे चुकाने के लिए सुमित्रा के पति विनोद चिकाने ने अपना मकान तक बेच दिया। उसके बाद जब पैसे नहीं बचे तो निजी अस्पताल ने सुमित्रा की छुट्टी कर दी। कहते है कि जा को राखो साईया मार सके ना कोई ऐसा ही कुछ सुमित्रा के साथ हुआ, जब सुमित्रा के पति ने कोशिश की तो उन्हें भगवान के मंदिर की तरह श्री ओम चिकित्सालय मिला, जहां सुमित्रा को भर्ती किया गया। बताया जा रहा है कि सुमित्रा को डबल निमोनिया हो गया था, लेकिन श्री ओम चिकित्सालय के डॉ. संदीप पाल और उनकी टीम ने हार नहीं मानी और सुमित्रा को ठीक करने का जो बीड़ा उठाया था, वो पूरा हुआ। अब सुमित्रा पूरी तरह स्वस्थ हो गई और चिकित्सालय से उसकी छुट्टी हो गई।
छुट्टी होने के दौरान सुमित्रा ने बताया कि ऐसा लगा ही नहीं कि हम अस्पताल में भर्ती है। ऐसा लग रहा था जैसे परिवार के सदस्य घर में हमारी सेवा कर रहे हो। यहां की नर्स इतनी अच्छी है कि पूरा ध्यान रख रही थी और बीच-बीच में बेटी की तरह मेरी कंघी भी कर रही थी। यहां पर हमारा पूरा इलाज नि:शुल्क किया गया। हमारे लिए यह अस्पताल मंदिर की तरह और यहां के डॉक्टर भगवान की तरह है, जिन्होंने हमारी जान बचाई। अगर दूसरे अस्पताल में होते तो मुश्किल ही बच पाते।
सुमित्रा के अलावा कोरोना को मात देने वाले कैलाश जुंजारे, रमेश साहू और तुलसीराम यादव की भी छुट्टी हुई। इन मरीजों ने भी श्री ओम चिकित्सालय की सराहना करते हुए कहा कि यहां पर मरीजों के इलाज में अस्पताल जैसा माहौल नहीं है। डॉक्टर और उनका स्टाफ पूरे सेवाभाव से इलाज करता है। यही कारण है कि मरीज जल्दी ठीक हो जाते है।
श्री ओम चिकित्सालय के संचालक सोनू पाल और डॉ. संदीप पाल ने बताया कि इस संकट की घड़ी में उनका चिकित्सालय नि:शुल्क रूप से मरीजों की सेवा करता है। इसके अलावा उन्हें इलाज के साथ आयुर्वेद काढ़ा, म्यूजिक थैरेपी, योग के माध्यम से भी ठीक किया जाता है।
Om Hospital introduced Mishaal - who was discharged by private hospital due to lack of money, the patient of double pneumonia was cured with free treatment

