मप्र में नदियां क्यो बदल रही अपना रंग? शिप्रा हरी, शिवना लाल और चंबल काली हो रही:
प्रदूषण के कारण तीन बड़ी नदियों का बदल गया रंग, स्नान तो दूर आचमन लायक भी नहीं
मध्यप्रदेश की तीन बड़ी नदियां। शिप्रा जो उज्जैन में मोक्षदायिनी बनी। चंबल लंबा सफर तय कर राजस्थान को सींचती है और मंदसौर की शिवना। प्रदूषण से अब ये नदियां रंग बदलने लगी हैं। शिप्रा में लगातार इंदौर से बहकर आ रही कान्ह का केमिकलयुक्त पानी मिल जाता है। सिंहस्थ से लेकर अन्य विशेष मौकों पर स्नान के लिए इसमें नर्मदा का पानी मिलाना पड़ रहा है।
लगातार गटर और केमिकल वाला पानी मिलने, सफाई नहीं होने के कारण अब इसका पानी हरा होने लगा है। ऐसे ही नागदा में बसे केमिकल वाले उद्योगों के कारण बार-बार चंबल की स्थिति बिगड़ती है। कुछ उद्योग और केमिकल सप्लायर टैंकर इसमें अपना एसिड डाल देते हैं। नतीजा : चंबल का पानी कुछ जगह काला हो गया है। कई जगह चंबल के पत्थर सफेद होने लगे हैं। तीसरी नदी है मंदसौर की शिवना। पशुपतिनाथ मंदिर के पास से गुजरती इस नदी का पानी अकसर लाल हो जाता है।
600 करोड़ रुपए खर्च, फिर भी शिप्रा को नहीं मिला मोक्ष
उज्जैन| शिप्रा बरसाती नदी बन गई है। बारिश के बाद इसका पानी स्टाॅपडेमों में रोक लिया जाता है। इसलिए जनवरी से बाद नदी में ठहरा हुआ पानी ही रह जाता है। इस पानी में इंदौर की कान्ह नदी का प्रदूषित पानी और शहर के नालों का पानी लगातार मिलने से शिप्रा में प्रदूषण होता है। इसके सुधार पर अब तक 600 करोड़ खर्च हो चुके हैं। अब यहां श्रद्धालुओं को डुबकी की बजाय फव्वारे से स्नान कराया जाता है। यह तस्वीर विश्वप्रसिद्ध उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर के पास की है। यहां का पानी हरा हो गया है।
केमिकल से हर साल लाल हो जाती है शिवना
मंदसौर | खानपुरा क्षेत्र में घर-घर में लच्छे बनाने का काम किया जाता है। इसमें रंगों का उपयोग होता है। लच्छे बनाने वाले लोग रंगों का उपयोग करने के बाद केमिकल का सारा पानी नालियों में बहा देते हैं। यह पानी सालों से शिवना में मिल रहा है। इससे नदी का पानी लाल हो जाता है। यह तस्वीर मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर के पास दो माह पहले की है। यहां शिवना का पानी लाल और बैंगनी हो जाता है।
टैंकर माफिया बहा देते हैं नदी में एसिड
नागदा| चंबल का पानी ही काला और कहीं हलका लाल हो गया। यह इस बात का प्रमाण है कि इसमें एसिड युक्त वेस्ट केमिकल मिला हुआ है। नागदा सहित आसपास के क्षेत्रों में एसिड माफियाओं द्वारा बहाये गए वेस्ट एसिड के कारण नदी के पानी के कई नुकसान ग्रामवासियों को भुगतना पड़ रहे हैं। चंबल की यह तस्वीर शुक्रवार दोपहर की है, जो नागदा से 9 किमी दूर गिदगढ़ में ली गई है।

