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Breaking News ज्योतिरादित्य सिंधिया हो सकते है केंद्र सरकार में नए रेलमंत्री :मोदी दे सकते हैं कमान ।

Breaking News Jyotiraditya Scindia may be the new railway minister in the central government: Modi can give command.





मध्य प्रदेश में पिछले साल मार्च में कमलनाथ सरकार के तख्तापलट में अहम भूमिका निभाने वाले राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा जल्द ही बड़ा तोहफा देने जा रही है। उन्हें मोदी सरकार में मंत्री पद दिया जाना लगभग तय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें रेलवे की कमान दे सकते हैं। गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता स्व. माधवराव सिंधिया भी राजीव गांधी सरकार में तीन साल रेल राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) रहे हैं।

BJP के एक बड़े नेता की मानें तो मध्य प्रदेश के कोटे से एक मंत्री की छुट्‌टी हो सकती है। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत और फग्गन सिंह कुलस्ते में से किसी एक को ड्रॉप किया जाता है तो राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय को मोदी अपनी टीम में शामिल कर सकते हैं। पार्टी की प्रारंभिक रणनीति विजयवर्गीय को खंडवा से लोकसभा चुनाव लड़ाने की है। यह सीट सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के निधन से खाली हुई है


पार्टी सूत्रों का कहना है कि पिछले सप्ताह एक कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री की ओर से कड़े फैसले लेने के संकेत दिए जा चुके हैं। उसी वक्त से ये कयास लगाए जा रहे हैं कि अच्छा प्रदर्शन नहीं करने वाले मंत्रियों पर गाज गिर सकती है। खबर है कि अनेक मंत्रियों पर यह खतरा मंडरा रहा है। पिछले महीने प्रधानमंत्री ने कई समूहों में बैठकें कर मंत्रियों के कामकाज की भी समीक्षा की थी।

बीजेपी के एक पदाधिकारी के मुताबिक, मोदी को पावर पॉलिटिक्स, एलायंस पॉलिटिक्स, कास्ट इक्वेशन, स्टेट रिप्रेजेंटेशन के साथ कई फ्रंट पर बैलेंस बनाकर चलना है। ऐसे में संभावना है कि मध्य प्रदेश से एक मंत्री को ड्राॅप किया जा सकता है।

अभी मध्यप्रदेश के कोटे से 4 मंत्री हैं

वर्तमान में यहां से मोदी कैबिनेट में चार मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, थावरचंद गहलोत, प्रहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते शामिल हैं। यदि विजयवर्गीय को मंत्री बनाया जाता है तो थावरचंद और फग्गन में से किसी एक की छुट्‌टी हो सकती है। बता दें कि विजयवर्गीय को गृह मंत्री अमित शाह का करीबी और भरोसेमंद कहा जाता है।

सिंधिया समर्थक एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि सिंधिया को रेलवे की कमान मिल सकती है। हालांकि उन्हें शहरी विकास या मानव संसाधन जैसे अहम मंत्रालय दिए जाने की भी चर्चा है। उन्हें भाजपा में शामिल हुए 15 महीने हो चुके हैं। अब भाजपा उनसे किया वादा पूरा करने जा रही है। इसके संकेत दिल्ली से लेकर मध्यप्रदेश तक हैं। अगर कोरोना न आया होता तो सिंधिया 2020 में ही मोदी कैबिनेट के मंत्री बन चुके होते।

यह संदेश भी देंगे मोदी
सिंधिया को सेंटर में लाकर नरेंद्र मोदी यह क्लियर मैसेज देंगे कि एमपी तो शिवराज सिंह चौहान ही संभालेंगे। सिंधिया राजपरिवार से ताल्लुक रखते हैं, फिलहाल वो राज्य सभा से बीजेपी के सांसद हैं। लोकसभा में वह गुना का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। एमपी में कांग्रेस की सरकार गिराने और बीजेपी की सरकार बनाने में ज्योतिरादित्य सिंधिया का रोल सबसे बड़ा था। सवा साल से सिंधिया कैबिनेट विस्तार का इंतजार कर रहे हैं। अब इनाम मिलने का वक्त करीब आ रहा है।

मनमोहन सरकार में बनी थी एक्टिव मंत्री की छवि
जानकारों का मानना है कि मोदी ज्योतिरादित्य को कैबिनेट मंत्री बनाएंगे। इसकी वजह यह है कि मनमोहन सरकार में भी उन्होंने अपने कामों के चलते एक एक्टिव मंत्री की छवि बनाई थी। मनमोहन सिंह सरकार में सिंधिया ऊर्जा राज्यमंत्री थे। इस बार वे टीम मोदी में शामिल होते हैं, तो फिर वे अपना काम दिखा पाएंगे। उनकी क्षमताओं का लाभ उन्हें प्रस्तावित फेरबदल में मिलने की पूरी संभावना है।

बीजेपी का फोकस नई लीडरशिप पर
सूत्रों की मानें तो बीजेपी का फोकस अब पार्टी में यूथ लीडरशिप को डेवलप करना है। इसे ध्यान में रखते हुए मोदी मंत्रिमंडल में मध्यप्रदेश कोटे से ज्योतिरादित्य सिंधिया, असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, ओडिशा के बैजयंत पांडा, महाराष्ट्र से देवेंद्र फडनवीस सहित कई युवा चेहरों को मौका मिल सकता है।

पहले टर्म में 6 महीने में हो गया था कैबिनेट विस्तार
पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने 6 महीने में ही कैबिनेट का विस्तार कर दिया था और मंत्रियों की संख्या 45 से बढ़ाकर 66 कर दी थी। इसके बाद सरकार के 2 साल पूरे होने के कुछ महीने बाद ही जुलाई 2016 में मोदी ने फिर कैबिनेट में फेरबदल कर मंत्रियों की संख्या बढ़ाकर 78 कर दी थी। इसके एक साल बाद भी उन्होंने मंत्रिमंडल में फेरबदल किया था।

दूसरे टर्म में 57 मंत्रियों के साथ शपथ ली थी
मोदी ने अपनी दूसरी पारी शुरू करते समय 30 मई 2019 को 57 मंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। मगर वर्तमान में उनकी टीम 53 मंत्रियों की ही है। दो मंत्री रामविलास पासवान और सुरेश अंगड़ी का निधन हो चुका है, जबकि दो कैबिनेट मंत्री हरसिमरत कौर बादल और अरविंद सावंत इस्तीफा दे चुके हैं


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