एक ओर वायरस की आहट - जीका वायरस की पुष्टि: फैल रहा मच्छरों के काटने से,भारत में यहां मिले 13 नए मरीज, पढे जीका वायरस के क्या हैं लक्षण, नवंबर 2018 में मध्यप्रदेश में भी मिले थे संदिग्ध
नवंबर 2018 में राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी मिले थे जीका वायरस के संदिग्ध मामले जिसके बाद में मध्यप्रदेश में अलर्ट जारी किया गया था
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जीका वायरस के तीन संदिग्ध मिले थे । ये संदिग्ध कोलार, गौतम नगर और अवधुपरी में मिले थे। वहीं एम्स भोपाल में इलाज के बाद इनकी छुट्टी कर दी गई थी !
कोरोना वायरस महामारी के बीच देश में अब जीका वायरस ने भी दस्तक दे दी है। केरल में गुरुवार को जीका वायरस के 13 केस पाए गए। तिरुवनंतपुरम से लिए गए सैंपल्स को जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे भेजा गया था, जहां जांच में इनकी पुष्टि हुई है।
जीका वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड (लक्षण दिखने में लगने वाला समय) 3 से 14 दिनों का होता है और अधिकतर लोगों में कोई वास्तविक लक्षण नहीं दिखता है। कुछ लोगों में बुखार, चकत्ते, सिरदर्द, मांशपेशियों और जोड़ों में दर्द की शिकायतें आती हैं। जीका वायरस गुलियन बैरी सिड्रोम पैदा करने के लिए भी जाना जाता है। यह नवजात बच्चों में पैदाइशी असामान्यता भी पैदा करता है।
ब्राजील में 2015 में जीका वायरस बड़े पैमाने पर फैल गया था, जिससे 1600 से अधिक बच्चे विकृति के साथ पैदा हुए थे। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने पहली बार नवंबर 2018 में जीका वायरस को अलग करने में सफलता पाई थी। भारत में पहली बार जनवरी 2017 में जीका वायरस का केस मिला था। इसके बाद जुलाई 2017 में तमिलनाडु में भी इसके केस मिले थे।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार जीका वायरस एक मच्छर जनित फ्लेविवायरस है, जिसे पहली बार 1947 में युगांडा में बंदरों में पहचाना गया था. इसे बाद में 1952 में युगांडा और संयुक्त गणराज्य तंजानिया में मनुष्यों में पहचाना गया। जीका वायरस रोग का प्रकोप अफ्रीका, अमेरिका, एशिया और प्रशांत में दर्ज किया गया है.
जानें जीका के बारे में...
जीका वायरस फ्लाविविरिडए वायरस फैमिली से है. यह मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है. जीका वायरस के लक्षण चिकनगुनिया की तरह ही होते हैं. दिन में एडीज मच्छर के समय काटने से यह रोग फैलता हैं. आम तौर पर जीका वायरस से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं नहीं होती हैं. बताया जा रहा है कि रोगी यदि आराम करे, तो रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है. हालांकि, यदि वायरस गर्भवती महिलाओं को संक्रमित करता है, तो इसका परिणाम जन्म दोष हो सकता है.
क्या हैं लक्षण
- मरीज में बुखार, शरीर पर लाल चकत्ते, दाने, आंखों का लाल होना, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, अस्वस्थता एवं सिरदर्द जैसे लक्ष्ण दिखाई देते हैं.
- आमतौर पर शख्स 2 से 7 दिनों तक प्रभावित रहता है.
- खासकर गर्भावस्था में महिलाएं इससे ज्यादा संक्रमित हो सकती हैं.
- इससे प्रभावित बच्चे का जन्म आकार में छोटे और अविकसित दिमाग के साथ होता है.
- खास बात यह है कि जीका वायरस से संक्रमित अधिकांश लोगों में लक्षण विकसित नहीं होते हैं.
जीका वायरस से बचाव या उपचार के तौर पर कुछ प्राकृतिक चीजों को खास मददगार माना जाता है।
1. लहसुन : लहसुन जीका के लिए एक अच्छा उपाय हो सकता है, क्योंकि लहसुन में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो वायरल, बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण से लड़ने में आपकी मदद कर सकते हैं।
लहसुन में पाया जाने वाला एक सक्रिय घटक एलिसिन आपकी इम्यूनिटी को मजबूत करने और मांसपेशियों में दर्द और बुखार से निपटने में सहायता कर सकता है। आप इसे अपने दैनिक आहार में शामिल कर सकते हैं।
2. पपीते के जूस: पपीता एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर है। आप अपनी प्रतिरक्षा को बढ़ाने, रक्त में प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने और संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए पपीते के जूस का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें शक्तिशाली एंजाइम जैसे पपेन पाया जाता है, जो आपकी उपचार करने में मदद कर सकता है।
ध्यान रखें- गर्भवती महिलाओं के लिए पपीता का रस अनुशंसित नहीं है। यह उनके भ्रूण के लिए खतरनाक हो सकता है। तो, गर्भवती महिलाओं को इससे बचना चाहिए।
3. विटामिन सी: शिमला मिर्च, स्ट्रॉबेरी और कीवी जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन सी से भरपूर होते हैं और ये एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते हैं, यह सफेद रक्त कोशिका उत्पादन में वृद्धि करते हैं, इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं और आपके क्षतिग्रस्त शरीर के अंगों की मरम्मत करते है
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