Madhya Pradesh is becoming an island of unrest, who is responsible for crimes against women and daughters? Vijaya Pathak, Editor, Jagat Vision
अशांति का टापू बनता जा रहा है मध्यप्रदेश
महिलाओं और बेटियों के साथ हो रहे अपराधों के लिए जिम्मेदार कौन?
प्रदेश में असफल पुलिस के पीछे जिम्मेदार कौन, डीजीपी या गृहमंत्री
पूर्व सीएम कमलनाथ ने नेमावर पीडि़त परिवार को कांग्रेस की ओर से दिए 20 लाख
विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन
महिला अपराधों के मामले में मध्यप्रदेश, देश की राजधानी बनने की राह पर है। तमाम दावों और प्रयासों के बावजूद भी यह कलंक मध्यप्रदेश के माथे से नहीं मिट पा रहा है। हालात यह है कि कोविड-19 के दौरान लगाए गए लॉकडाउन में भी प्रदेश में महिला अपराधों में कमी नहीं आई। मध्यप्रदेश पुलिस की ओर से हर माह जारी किए जाने वाली रिपोर्ट में कुछ ऐसे आंकड़े निकलकर सामने आए हैं जिन्हें सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। मध्यप्रदेश पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले 12 महीनों में ही चार हजार से ज्यादा दुष्कर्म और 6 हजार अपहरण के मामले सामने आ चुके हैं। शांति का टापू जाने वाले मध्यप्रदेश में महिलाएं और बेटियों के साथ लगातार आपराधिक मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक तरफ जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा प्रदेश में महिलाओं और बेटियों के सुरक्षित होने का दावे कर रहे हैं, वहीं क्राइम रिकॉर्ड इन दावों को खोखला बता रहा है। असल में प्रदेश में महिलाएं और बेटियां हमेशा से ही अपराधियों का शिकार होती रही हैं। हर माह प्रदेश में औसतन 700 से अधिक प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं। भोपाल और इंदौर रेंज के अंतर्गत आने वाले शहरों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की संख्या सबसे अधिक है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब प्रदेश के इन दो बड़े शहरों में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं जहां बड़ी संख्या में पुलिसिया तंत्र मौजूद है तो, अन्य छोटे स्थानों में क्या स्थिति होगी। आंकडे बताते हैं कि इस वर्ष जनवरी से अप्रैल के बीच महिला अपराधों के आंकड़ों में अपहरण, छेड़छाड़ और दुष्कर्म के प्रकरणों की संख्या काफी अधिक है। सामान्य अपराध जैसे घरेलू हिंसा के मामलों में केस दर्ज होने का औसत भी करीब एक हजार है। भोपाल और इंदौर रेंज के तहत आने वाले शहरों में गंभीर अपराधों की संख्या सबसे अधिक है। चार माह के दौरान हत्या, हत्या के प्रयास जैसे मामले कम रहे हैं। इंदौर रेंज में धार, इंदौर, झाबुआ और अलीराजपुर तो भोपाल रेंज में भोपाल, राजगढ़, सीहोर और विदिशा शहर आते हैं। हालांकि अप्रैल माह में बीते तीन माह की तुलना में छेड़छाड़, अपहरण और दुष्कर्म के मामले कम रहे हैं। इस माह में छेड़छाड़ के 578, अपहरण के 666 और दुष्कर्म के 403 प्रकरण दर्ज किए गए।
ताजा मामला दो दिन पहले जहां 36 घंटे में 3 से 11 साल की बच्चियों के साथ चार जगह जघन्य अपराध की घटनाएं घटित हुई हैं। प्रदेश में बीते वर्ष हुई आपराधिक घटनाओं की बात करें तो जनवरी 2020 से लेकर अक्टूबर 2020 तक ही प्रदेश भर में 45 हजार 920 महिला अपराध घटित हुए हैं। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, मारपीट, अपहरण, दहेज प्रताड़ना समेत छेड़छाड़ और बलात्कार के मामले शामिल हैं। महज 8 महीनों में ही 3 हजार 800 से भी ज्यादा महिलाओं के साथ ज्यादती की गई है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि लॉकडाउन के दौरान भी 11 हजार से ज्यादा महिला अपराध प्रदेश के अलग-अलग थानों में दर्ज किए गए। यह घटनाएं बयां करती हैं प्रदेश में पुलिसिया तंत्र कितना एक्टिव है। अपराधियों के मन में पुलिस और कानून का कोई भय नहीं है। सब बैखोफ घूम रहे हैं औऱ अपराधों को अंजाम देने में जुटे हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब घर के बाहर महिलाओं का बेधड़क निकलना दूभर हो जाएगा। एक तरफ जहां प्रदेश में आपराधिक मामले इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा सिर्फ उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। कानून की समीक्षा कर रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री और गृहमंत्री समय-समय पर समीक्षा बैठके करते हैं और अफसरों को कानून व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश देते हैं तो फिर आखिर ये घटनाएं कैसे हो रही हैं? इन घटनाओं पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है। क्या इसके जिम्मेदार स्वयं पुलिस प्रशासन और गृहमंत्री है? अगर ऐसा है तो इस दिशा में कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है और महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले लोगों पर सख्त कार्यवाही होना चाहिए। मध्यप्रदेश में महिला अपराध पर रोक लगाने के लिए सरकार ने सख्त कानून बनाया है। इसके तहत उस दुष्कर्मियों को फांसी की सजा तो सुनाई गई लेकिन आज तक कोई भी फांसी के तख्ते तक नहीं पहुंच पाया।
मध्यप्रदेश में इस साल क्राइम रेट का ग्राफ तेजी बढ़ रहा है। खासतौर पर महिला अपराध के मामले रोजाना सामने आ रहे हैं। जिसे रोकने में एमपी पुलिस नाकाम नजर आ रही है। हाल ही में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कानून व्यवस्था को लेकर हाई लेवल मीटिंग की, जिसमें भयावह मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की बात कही है। मध्यप्रदेश के बड़े अपराधों ने प्रदेश ही नहीं पूरे देश को झंकझोर कर रख दिया था। झाबुआ की रहने वाली एक महिला ने भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह नायक के खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाये थे, महिला ने पुलिस चौकी बामनिया से लेकर एसपी कलेक्टर, प्रभारी मंत्री से लेकर पुलिस के आला अधिकारीयों को शिकायत की, लेकिन उसके आरोपों पर ना तो जांच हुई और ना ही आरोपी जिलाध्यक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई, महिला अपनी पीड़ा लेकर झाबुआ पहुंची और न्याय की मांग को लेकर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
पूर्व सीएम कमलनाथ ने नेमावर पीडि़त परिवार को कांग्रेस की ओर से दिए 20 लाख
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नेमावर हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने इस जघन्य हत्याकांड की CBI जांच की मांग की। साथ ही कांग्रेस की ओर से पीड़ित परिवार को 5-5 लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। यानि कुल 20 लाख रूपये की मदद की। इस दौरान कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी यह लड़ाई आखिरी तक लड़ेगी। क्योंकि यह एक परिवार का मामला नहीं है बल्कि पूरे आदिवासी समाज का मामला है। बढ़ते अपराध को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। मध्यप्रदेश में बढ़ते क्राइम के ग्राफ को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है। विपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि माफियाओं को गड्ढे में गाड़ने वाले मुख्यमंत्री के राज में 5 आदिवासियों को गड्ढे में गाड़ दिया गया, प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहाल हो गई है। जीतू पटवारी ने कहा कि गृहमंत्री रोज मीडिया से चर्चा करते हैं और कांग्रेस को कोसते हैं लेकिन अपने मंत्रालय को लेकर स्थिति सर्वविदित है। अलीराजपुर में तालिबानी सजा एक युवती को अपने ही परिजनों की हैवानियत का उस समय शिकार होना पड़ा, जब वह बिना बताए घर से किसी रिश्तेदार के यहां चली गई थी। युवती को उसके पिता, भाई और चचेरे भाई ने डंडों से बुरी तरह पीटा। फिलहाल पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने पिता और तीन भाइयों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
साल 2020 में महिला अपराध
महिलाओं के साथ दुश्कर्म के मामले-
प्रति माह के मुताबिक जनवरी में 372, फरवरी में 365, मार्च में 358, अप्रैल में 206, मई में 357, जून में 434, जुलाई में 439, अगस्त में 382, सितंबर में 418, अक्टूबर में 486, नवंबर में 376 मामले और दिसंबर में 339 मामले दुष्कर्म के दर्ज किए गए।
महिला अपहरण-
जनवरी में 675, फरवरी में 773, मार्च में 645, अप्रैल में 207, मई में 381, जून में 624, जुलाई में 566, अगस्त में 569, सितंबर में 638, अक्टूबर में 601, नवंबर में 659 और दिसंबर में 611 अपरहण किए गए हैं। यानी कि साल 2020 में कुल 6949 अपहरण के मामले दर्ज हुए और रोजाना औसत 20 अपहरण हुए।
आखिर में सवाल उठता है कि महिलाओं के उपर बढ़ते अपराधों के पीछे जिम्मेदार कौन है। क्यों शांति के टापू कहे जाने वाले मध्यप्रदेश में इस तरह के अपराधों का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। हम मानते हैं कि इस तरह के अपराधों को प्रोत्साहन देने में हमारी कानून व्यवस्था तो जिम्मेदार है लेकिन इसके साथ-साथ हमारा समाज भी कहीं न कहीं भागीदार है। महिला अपराधों में समाज की मूकदर्शिता बढ़ते अपराधों का कारण भी हो सकती है। समाज को चाहिए कि वह सक्रियता दिखाते हुए सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर अपराधियों को सजा दिलाने में आगे आए।

