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स्कूबी डाग ने पानी से खोज निकाली बाघिन की खाल। धनवर्षा कराने के लिए किया था बाघिन का शिकार, गिरफ्त में आए 4 शिकारी।

Scooby Dog discovered the skin of a tigress from the water. Tigress was hunted to get money rain, 4 hunters got caught.







छिंदवाड़ा। सतपुडा टाईगर रिजर्व से लगे झिरपा वन परिक्षेत्र के मीराकोटा गांव से आठ महिने पहले एक बाघिन का शिकार किए जाने के मामले में वन महक मे ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मीराकोटा निवासी नारायण पिता लेखराम पचलिया, श्रीलाल पिता मोहन भारती, राजेश पिता मंहगू भारती, हरीश चंद्र पिता जगदीश ढाकरिया को बाघिन की खाल, नाखुन, सिर और अन्य अंगों के अवशेष के साथ गिरफ्तार कर उन्हे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। इस बड़ी कार्रवाई में वन विभाग के डाग स्कावड ने अहम भूमिका निभाई और चंद मिनटों में बाघ की खाल और अन्य अवशेषों को ढूढ निकाला, जिसके बाद वन विभाग के हाथ शिकारी लग पाए।




स्कूबी डाग ने पानी के अंदर से निकाली खाल
पश्चिम वन मंडल के अधिकारी और वनकर्मियों को जब बाघिन की शिकार की सूचना मिली तो उन्होंने सर्चिंग तो प्रारंभ कर दी लेकिन उन्होंने ना तो शिकारी हाथ लगे और ना ही बाघ के अवशेष। बाद में वन महकमे के डाग स्कावड की मदद ली गई जिसमें स्कूबी डाग को मीराकोटा गांव के कुछ संदिग्धों स्पाट पर ले जाया गया जहां वन महकमे को शक था। स्कूबी ने यहां से कुछ दूर स्थित तालाब के पास जाकर भौंकना प्रारंभ किया तो तत्काल वन मकहमे ने यहां तलाशी ली तो खाल से भरी पन्नी निकलकर सामने आ गई। बाद में संदेहियों से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने सारा राज उगल दिया।


धन की बारिश कराने के लिए किया था शिकार
मीराकोटा गांव के चारों आरोपियों ने अंधविश्वास के रातों रात अमीर बनने के चक्कर में झिरपा वन परिक्षेत्र के बफर जोन के घने जंगलों में करंट लगाकर मादा बाघ का शिकार किया था जिसकी उम्र 6 से 8 साल की थी। उसकी खाल निकालकर सभी शिकारी भुमका को ढृूढ रहे थे जो बाघ की खाल के सहारे धन वर्षा करा सके, लेकिन कुछ लोगों को इसकी भनक लग गई और वन विभाग ने इनकी सर्चिंग प्रारंभ कर इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।

तबादले के दो दिन बाद किया खुलासा, उठे सवाल
लगभग 8 माह पहले झिरपा वन परिक्षेत्र में मादा बाघिन का शिकार होने के मामले को इतनी देरी से उजागर करने वाले डीएफओ आलोक पाठक की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। दो दिन पहले ही पाठक का तबादला छिंदवाड़ा से भोपाल किया गया है ऐसे में ट्रांसफर के दो दिन बाद रिलीव होने के बजाय इतने संवेदनशील मामले का खुलासा करना समझ से परे नजर आ रहा है। वन विभाग से जुड़े सूत्रों की माने तो यह मामला लंबे समय से सुखिर्यो में था लेकिन अब जाके इसका खुलासा करने के पीछे कई राज छिपे हुए है।


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