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किस-किस ने हैं टिकट मांगा। कांग्रेस कार्यलय में क्यों हुआ हंगामा। नगर पालिका चुनाव से पूर्व कांग्रेस की रिहर्सल पॉलिटिक्स।

किस-किस ने हैं टिकट मांगा। कांग्रेस कार्यलय में क्यों हुआ हंगामा। नगर पालिका चुनाव से पूर्व कांग्रेस की रिहर्सल पॉलिटिक्स।



 ✍️ शाहरूख मिर्जा 

मंदसौर - नगर पालिका चुनाव से पूर्व जिला कांग्रेस कार्यलय में प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक बटुक शंकर जोशी मन्दसौर आए उनके सामने दो अल्पसंख्यक कांग्रेस नेता आपस में भिड़ लिए इनमें से एक पूर्व में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मोहम्मद खलील शेख है तो दूसरे जिला कांग्रेस कमेटी महामंत्री असगर मेंव का नाम शामिल है।

बता दे कि मोहम्मद खलील शेख किसी जमाने में वर्तमान जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नवकृष्ण पाटिल के खास समर्थक में शुमार रहे हैं तो असगर मेंव पर पूर्व मंत्री नाहटा समर्थक होने की छाप लगी हुई है इन दोनों अल्पसंख्यक नेताओं का आपस में भिडना और हंगामा करना काफी चर्चाओं में है इस हंगामे की घटना के बाद कांग्रेस जनों में यह चर्चा रही कि नगर पालिका चुनाव को देख कर के कुछ जीरो बने हुए नेता हीरो बनने का प्रयास कर रहे हैं और अपने समर्थकों को मुस्लिम बहुलीय क्षेत्रों में पार्षदों का टिकट दिलाने के लिए अभी से प्रयासरत हो गए हैं ताकि टिकट वितरण करने वाला नेता भी उनका भगत बन सके कल तक जो नेता पूर्व में कमलनाथ सरकार के दौरान भी निष्क्रिय रहे वह आज फिर नेता बनने के प्रयास में जुट गए हैं यह घटनाक्रम नगर पालिका चुनाव की एक रिहर्सल हैं।

मंदसौर नगर पालिका में  करीब 35 सालों से भाजपा नगर पालिका पर अपना कब्जा बनाए हुई है और कांग्रेस में गलत टिकट वितरण ही उसका हार का प्रमुख कारण बनता है इसके बावजूद कांग्रेस एक बार फिर चुनाव जीतने का सपना संजोए हुए बैठी हुई है एक बार खुद वर्तमान जिला कांग्रेस अध्यक्ष नवकृष्ण पाटिल भी नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ चुके हैं और हार चुके हैं।

राजनीति जानकार सूत्रों का कहना है कि जब पूर्व में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ने वाली मीनाक्षी नटराजन मंदसौर आई थी तब उन्हें कोई नहीं पहचानता था तब चर्चाओं में लाने के लिए नाहटा चौराहे पर उनके पुतले तक जलाए गए थे विरोध प्रदर्शन किये गये थे, इसके बाद ही वह लोकसभा चुनाव में काफी चर्चित हो गई थी और भाजपा के कद्दावर नेता लक्ष्मी नारायण पांडे को लोकसभा चुनाव में हराने में सफल हो गई थी।

क्या कांग्रेस नेताओं का हंगामा एक चुनावी रिहर्सल हैं क्या कांग्रेस की भाजपा को मात देने की एक पॉलिटिक्स है चर्चाएं तो यह भी चल रही है कि कांग्रेस से कोई नया चेहरा नगर पालिका अध्यक्ष की दौड़ में उतर सकता है कांग्रेस पर्यवेक्षक अध्यक्ष पद के 8 से10 उम्मीदवारों के नामों का पैनल और 150 से ज्यादा पार्षद पदों के उम्मीदवारों के नाम का पैनल लेकर गए हैं।

अब अहम सवाल यह है कि मंदसौर नगर पालिका क्षेत्र में 40 वार्डो में से 20 वार्डों में अल्पसंख्यक प्रभावित क्षेत्र है जहां से 20 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को टिकट दिलाने के लिए क्या यह हंगामा खड़ा किया गया है इसलिए इस हंगामे ने भाजपा को चिंता में डाल दिया है न तो नवकृष्ण पाटिल को चुनाव लड़ना है लेकिन ऐन वक्त पर वह अहम भूमिका निभा सकते हैं दूसरी ओर अल्पसंख्यक नेता अपने समर्थकों को टिकट दिलाने के लिए दबाव बना सकते हैं क्योंकि पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा व सौमिल नाहटा भी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं फिर यह बेवजह का कांग्रेस कार्यालय में हंगामा किस बात की ओर संकेत कर रहा है किस-किस ने हैं टिकट मांगा..फिर क्यों हुआ है यह हंगामा..ये सबको सोचने पर विवश कर रहा है कि इस हंगामे के पीछे कांग्रेस की कोई बड़ी रणनीति तो छुपी हुई तो नहीं है।

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