The volunteers of the Rashtriya Swayamsevak Sangh are planting seeds.
आठनेर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों के द्वारा आठनेर खण्ड के ग्राम जावरा में नीम के 1000 बीजों का रोपण किया गए स्वयंसेवक संदीप वंजारे और आयुष पंडाग्रे ने बताया कि हमारा नीम का पेड़ ही स्वंय प्रकृति का पोषक व संरक्षण के लिए पल्लवित प्रजाति हैं मानवता का एक सच्चा ओर अच्छा दोस्त हैं निम्बोली भी नीम बनाना चाहती हैं उसकी चाहत को पूरी किया जाना आवश्यक हैं प्रकृति फले फुले इसकी प्रोग्रामिंग स्वंय प्रकृति ने कर रखी हैं नीम का पौधा 7 से 10 दिन में अंकुरित हो जाता हैं नीम की पत्तियों से लेकर बीज तक सब कुछ अत्यंत उपयोगी और औषधीय गुणों से भरपूर होता है। त्वचा,पेट, आंखे और विषाणु जनित समस्याओं में इसका प्रयोग अद्भुत होता है। किसी भी तरह के संक्रमण को रोकने में नीम की पत्तियां कारगर सिद्ध होती हैं।नीम का पेड़ किसी खजाने से कम नहीं है. नीम की पत्ती, छाल और बीज आपको कई स्वास्थ्य लाभ देते हैं. अगर आपको खुद को फिट रखना है तो नियमित रुप से नीम की कुछ पत्तियां खाएं. खासतौर से बारिश के मौसम में नीम का उपयोग जरूर करना चाहिए. आयुर्वेद की कई दवाओं में नीम का इस्तेमाल किया जाता है. कोरोना महामारी में भी नीम बहुत फायदेमंद है. नीम से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. नीम का जूस, काढ़ा और गोली खाने से आपकी इम्यूनिटी मजबूत होती है. इसके अलावा नीम में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जिससे बैक्टीरियल इंफेक्शन खत्म हो जाते हैं. अगर आप नियमित रुप से नीम का जूस पीते हैं तो इससे आपको वजन घटाने में भी मदद मिलेगी.गुणों की खान हैं नीम घर के आगे और गांव के आसपास यदि सेकड़ो नीम हैं तो आप रोगों से दूर रहेंगे यदि आपके खेत की मेड पर नीम का पेड़ हैं तो आपके खेत की फसल वायरस,फफूंदी से बची रहेगी आपकी पहाड़ी यदि नीम से भरी हैं तो उसका पानी किसी अमृत से कम नही।

