शून्य को एक में बदलते देखने की खुशी ❤️
कहते हैं सुबह के सपने हक़ीक़त में तब्दील हो जाते हैं. लेकिन उस हक़ीक़त को क्या कहें जो सुबह-सुबह किसी सपने जैसी लगे.
2 अगस्त 2021 की सुबह शायद ही किसी हिंदुस्तानी ने सोचा होगा कि आज उन्हें नींद से जगने के बाद एक अद्भुत-अविश्वनीय सपना देखने को मिलेगा.
शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि हफ्ते के पहले दिन महिला हॉकी की स्टिक उनकी धड़कनें बढ़ा रही होगी.
लेकिन हिंदुस्तान से मीलों दूर टोक्यो की गहरी नीली टर्फ पर खड़ी, आसमानी नीली जर्सी पहने उन लड़कियों को आज सपनों की नहीं, बल्कि हक़ीक़त की जंग जीतने का भरोसा था.
उन्हें विश्वास था कि घर के जिन पहरों को लांघकर वो आज यहां खड़ी हैं वहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने कितनी नींदें कुर्बान की.
उन्हें याद था रियो ओलंपिक का वो बुरा ख़्वाब, जब अंक तालिका में उनके नाम के आगे शून्य लगा था.
वो बीते डेढ़ साल से एक मैच तक नहीं खेल सकी थीं और उनकी कप्तान सहित 9 साथी कोरोना की मार झेल चुकी थीं.
कुछ लोगों ने मान लिया था कि गांव और छोटी-छोटी कोठरियों से निकली इन लड़कियों का पीली जर्सी में चमकती विरोधियों को देखकर ही दम फूल जाएगा.
लेकिन आज का सूरज शायद इतिहास देखने के लिए ही टोक्यो में उदय हुआ था. मैच की पहली सीटी से पूरे मैदान पर हर तरफ नीली जर्सी अपना दम दिखाती रही.
जिन लड़कियों के नाम इस ओलंपिक में सबसे ख़राब पेनल्टी कॉर्नर का रिकॉर्ड था, आज उन्हें सिर्फ एक पेनल्टी कॉर्नर मिला और उन्होंने उस मौक़े जाने नहीं दिया.
स्कोर बोर्ड पर जब भारत के आगे शून्य के बदले एक लिखा जा रहा था, तो वो पल अपने आप में आंखों में आंसूं भर देने वाला था.
हम तीन बार की ओलंपिक चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से आगे थे. ये बात अगर आज से पहले कोई किसी से कहता तो इस पर ज़ोर से हँसी छूट जाती.
हँसी आज भी हमारे चेहरों पर थी लेकिन उनके साथ आंखों में आंसू भी थे.
हमने आज नींद से जगने के बाद सपना देखा था, हमने आज शून्य को एक में बदलते देखा.

