people of Scindia camp is increasing in the state.
The number of people supported by Jyotiraditya may increase from the cabinet to the corporation board
प्रदेश में बढ़ता जा रहा है सिंधिया खेमे के लोगों का दबदबा।
मंत्रीमंडल से लेकर निगम मंडल में ज्योतिरादित्य समर्थित लोगों की बढ़ सकती है संख्या
मुख्यमंत्री के लिए बड़ी चुनौति निगम मंडल की सूची बाहर आने के बाद निराश भाजपा कार्यकर्ताओं को कैसे मनाएंगे।
विजया पाठक, एडिटर जगत विजन।
मध्य प्रदेश में सिंधिया खेमे के लोगों का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले प्रदेश में शिवराज सरकार में सिंधिया समर्थकों को मंत्रीमंडल में मनचाहा पोर्टफोलियों और उसके बाद प्रदेश कार्य समिति में ग्वालियर चंबल इलाके में मनचाहे व्यक्तियों का चयन और अब सभी की निगाहे जल्द जारी होने जा रही निगम मंडल के अध्यक्षों के नामों की सूची पर है। बताया जा रहा है कि इस सूची में भी सिंधिया खेमे के लोगों की संख्या ज्यादा होगी। जानकारों की माने तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित संगठन से सिंधिया द्वारा सौपी गई सूची के नामों पर सहमति बन गई है। मुख्यमंत्री जल्द ही निगम मंडल के अध्यक्षों की सूची जारी कर सकते है। बीजेपी के तमाम दावेदार नेताओं को लगता है कि मंत्रिमंडल की तरह निगम मंडल की नियुक्तियों में भी ग्वालियर चंबल संभाग का दबदबा होगा, उसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि वर्तमान समय में बीजेपी के तीन बड़े नेता अंचल से आते हैं चाहे वह प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा हो, राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया हो या फिर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर। जानकारों की माने तो तीनों ही अपने-अपने कार्यकर्ताओं को निगम मंडल में बैठाने को लेकर व्यवस्था करने में लगे हुए हैं। हालांकि किसे निगम मंडल में जगह मिलेगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन फिलहाल ग्वालियर चंबल संभाग में इसको लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। ग्वालियर-चंबल से जिन नेताओं को निगम मंडलों में नियुक्तियां मिल सकती है उनमें सबसे पहले नाम पूर्व मंत्री और सिंधिया समर्थक इमरती देवी का है। इसके अलावा गिर्राज दंडौतिया, मुन्नालाल गोयल, एंदल सिंह कंसाना आदि का नाम फाइनल माना जा रहा है। सिंधिया समर्थकों को कैबिनेट में जगह मिलने के बाद भाजपा के कई नेताओं को कोई पद नहीं मिल सका है। ऐसे में भाजपा की कोशिश है कि उपचुनाव से पहले वह असंतुष्ट नेताओं को निगम मंडल में नियुक्ति देकर उन्हें खुश कर सकती है। इस सिलसिले में पिछले दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कई बार दिल्ली का दौरा कर चुके है और उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से लेकर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तक से मुलाकात की है। अगर सूची में सिंधिया समर्थकों के चारों नाम शामिल होते है तो निश्चित ही यह भाजपा कार्यकर्ताओंं के लिए बड़ा झटका होगा, क्योंकि शिवराज सरकार लगातार सिंधिया के दबाव में आकर उनके मनचाहे अनुसार निर्णय लेती जा रही है। ऐसे में निगम मंडल के अध्यक्षों का नाम फाइनल कर पाना शिवराज सरकार के लिए एक कठिन चुनौति होगी, जिससे काम भी हो जाए और कोई सर्मथक उनसे नाराज न होने पाए। देखा जाए तो नए मंत्रिमंडल में मालवा-निमाड़ को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई है। इस क्षेत्र के बड़े नेता कैलाश विजयवर्गीय पहले से ही भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में केंद्रीय राजनीति में है, जबकि महाकौशल व विंध्य क्षेत्र के प्रमुख नेता सरकार में जगह पाने में नाकामयाब रहे हैं और जिन लोगों को जगह मिली है वे शिवराज सिंह चौहान और संगठन की पसंद से मंत्री बने हैं।

